माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। हैंडलूम उद्योग के लिए देश-विदेश में पहचान रखने वाला पानीपत जिला कभी भी आग का गोला बन सकता है। जिले में चल रहीं ज्यादातर फैक्टरी मानकों पर खरी नहीं हैं।
यहां तक कि फैक्टरियों में फायर फाइटिंग सिस्टम तक नहीं हैं। 20 दिन में 10 से अधिक फैक्टरियों में आग लग चुकी है। इनमें से किसी भी फैक्टरी में आग बुझाने के इंतजाम नहीं थे। प्रशिक्षित कर्मचारी भी तैनात नहीं थे जिससे फैक्टरियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं।
9 नवंबर को जाटल रोड पर आबादी क्षेत्र में फैक्टरी में आग लगी थी जिसमें पांच महिला श्रमिक झुलस गई थी और एक की उपचार के दौरान मौत हो चुकी है। हादसे के बाद फैक्टरियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हुए थे लेकिन सिस्टम ने इससे सबक नहीं लिया। फैक्टरियों में आग लगने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। इसी माह 10 से अधिक फैक्टरियों में आग लग चुकी हैं जिन फैक्टरियों में आग लगी हैं उनमें ज्यादातर के मानक पूरे नहीं थे।
साथ ही फैक्टरियों में प्रशिक्षित कर्मचारी की भी तैनाती होनी चाहिए लेकिन ज्यादातर फैक्टरी मालिक फायर सेफ्टी ऑफिसर के पद पर किसी की तैनाती नहीं करते। जिले में आग लगने की घटनाएं बढ़ने के बावजूद दमकल विभाग के पास पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। जिले में दमकल विभाग के पास दो फायर स्टेशन पानीपत और समालखा में 15 फायर टेंडर हैं।
विभाग को कम से कम 25 नई गाड़ी चाहिए। इसके अलावा जिले में दमकल विभाग में 200 में से 20 पद खाली हैं। आग की घटना होने पर सोनीपत, करनाल, रोहतक से सहायता मांगनी पड़ती है।