यमुनानगर। महिला चिकित्सक को डिजिटल अरेस्ट करने के मामले में साइबर क्राइम पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। चिकित्सक को 10 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा गया। चिकित्सक के बारे में पल-पल की जानकारी ली गई। यही नहीं उनके मोबाइल पर फर्जी नोटिस भी भेजे गए। उसे फोन कॉल भी विदेशी नंबरों से की गई थी।
उल्लेखनीय है कि यमुनानगर में डिजिटल अरेस्ट का मामला सामने आया था। सेक्टर-17 हुडा निवासी एक महिला चिकित्सक के साथ साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट कर 13 लाख 20 हजार रुपये से अधिक की ठगी की थी। साइबर क्राइम थाना पुलिस ने मामले की जांच की। चिकित्सक को पहली कॉल नौ नवंबर को आई थी। उस समय फोन कॉल करने वाले ने खुद को सीबीआई दिल्ली का अधिकारी बताया था। साथ ही चिकित्सक को बताया गया कि उनका नाम मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में सामने आया है। जिससे चिकित्सक घबरा गई। इसके बाद उसे लगातार कॉल आते रहे। खुद को अधिकारी होने का विश्वास दिलाने के लिए साइबर ठगों ने उसके मोबाइल पर सीबीआई के अधिकारी बनकर फोटो और नोटिस भी जारी किए थे।साइबर ठगों ने उसे सोचने तक का मौका नहीं दिया और फोन कॉल करते रहे। यह सिलसिला 10 दिन तक चलता रहा। पुलिस ने अब फोन कॉल की डिटेल खंगालनी शुरू की तो पता चला है कि यह फोन कॉल विदेशी नंबरों से की गई थी। जिसकी जांच की जा रही है।
एसएचओ साइबर क्राइम थाना रविकांत ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट का यमुनानगर का यह पहला मामला है। इसकी जांच की जा रही है। साथ ही लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है।
क्या है डिजिटल अरेस्ट
डिजिटल अरेस्ट ब्लैकमेल करने का एक एडवांस तरीका है। डिजिटल अरेस्ट के दाैरान यह एहसास कराया जाता है कि कोई आपको ऑनलाइन धमकी देकर वीडियो कॉलिंग के जरिये आप पर नजर रख रहा है। डिजिटल अरेस्ट के दौरान साइबर ठग नकली पुलिस अधिकारी बनकर लोगों को धमकाते हैं और अपना शिकार बनाते हैं। इस दौरान वे लोगों से वीडियो कॉल पर लगातार बने रहने के लिए कहते हैं और इसी बीच केस को खत्म करने के लिए पैसे भी ट्रांसफर करवाते रहते हैं। यह एक साइबर अपराध है। अपराधी किसी व्यक्ति की सोशल मीडिया प्रोफाइल से जानकारी चुराकर उसे मानसिक रूप से परेशान करते हैं। कई तरह की धमकियां देकर पीड़ित से रुपये ऐंठे जाते हैं। घबराकर व्यक्ति इसका शिकार हो जाते हैं।