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धुंध के साथ बढ़ रहा हादसों का डर

Mon, 16 Dec 2013 12:03 AM IST
अमर उजाला, पानीपत
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पानीपत के टेक्सटाइल नगरी में धुंध शुरू होते ही शहरवासियों को रात के समय डर के साये से गुुजरना पड़ता है। औद्योगिक नगरी होने के कारण शहर में दिन और रात को शहरवासियों का आवागमन रहता है।
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कोई रात को काम करके घर लौट रहा होता है तो कोई काम पर जा रहा होता है। इस तरह रात के समय आने जाने वालों के लिए शहर सड़कों और चौक चौराहों पर गुजरना जोखिम भरा है, क्योंकि शहर की अनेक सड़कों और चौक-चौराहों पर स्ट्रीट लाइट नहीं है। जहां लगी हैं, वो खराब हैं।

इसके अलावा निगम अधिकारी खराब और बंद लाइटों को जल्द ठीक कराने का दावा कर रहे हैं। पानीपत में छोटी-बड़ी करीब दस हजार टेक्सटाइल इकाइयां हैं। यहां पर करीब दो लाख लोग बतौर प्रबंधक, प्लानर, डिजाइनर,  सुपरवाइजर, मास्टर, कारीगर और श्रमिक काम कर रहे हैं। फैक्टरियों में दिनरात काम चलने के कारण तीन शिफ्टें लगती हैं।
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ऐसे में यहां काम करने वालाें का घर से फैक्टरी और फैक्टरी से घर आने जाने का सिलसिला दिन के अलावा रात को भी चलता है। मगर इन दिनों यह राह मुश्किल हो जाती है। इस मुश्किल को बढ़ातीं हैं सड़कों, गलियाें और रास्तों पर खराब स्ट्रीट लाइटें।

ऐसे में रात को कोहरे में घर या फैक्टरी पहुंचना जान लेवा हो जाता है। इन दिनाें में कई लोग हादसों में काल का ग्रास बन जाते हैं तो कई गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं। इस सीजन में हादसाें के बढ़ने के बाद भी प्रशासन ने कोई सबक नहीं लिया।  

कोहरे के मौसम में तो और भी ज्यादा सक्रिय हो जाता हैं। ऐसे में लूटपाट और मारपीट की घटनाएं होना आम बात हो जाती हैं। शहर व इसके आसपास लूटपाट की घटनाओं को अंजाम देने वाले ताक में रहते हैं। जहां पर ज्यादा सुनसान रास्ते हैं, वहां पर तो परेशानी ओर भी ज्यादा बढ़ जाएगी।

शहर में रात के समय ज्यादातर मजदूर ही आवागमन करते हैं। ये पैदल ही होते हैं या फिर साइकिल पर होते हैं। शरारती तत्व इस बात का भी ज्यादा फायदा उठाते हैं। मजदूरों का यह तबका उनके साथ होने वाली इस तरह की अप्रिय घटनाआें की शिकायत भी थाने में नहीं देते।

नगर निगम अधिकारियों के अनुसार इस समय शहर में करीब पांच हजार स्ट्रीट लाइट हैं। शहरवासियों की माने तो निगम अधिकारी अपनी साख को बचाने के लिए इस तरह का दावा कर रहे हैं। शहर में जहां पर स्ट्रीट लाइट लगी हैं उनमें से ज्यादातर तो खराब ही पड़ी हैं। जो चालू हालत में हैं, वे दिन में भी जलती रहती हैं।

वहीं वास्तविकता यह है कि धुंध शुरू होने से पहले नगर निगम ने भी सड़कों और चौक-चौराहों पर स्ट्रीट लाइट लगवाने से संबंधी कोई आवश्यक कदम नहीं उठाए। कहीं पर भी फॉग लाइट लगवाने के प्रबंध नहीं किए। किसी भी जगहों पर नई स्ट्रीट और ट्यूब लाइट लगवाने का की दिशा में कोई काम नजर आ रहा। पहले ही मौजूद पुरानी स्ट्रीट या ट्यूब लाइटों को ठीक कराने की भी जहमत नहीं उठाई गई।

शहर में जहां पर भी स्ट्रीट लाइट व ट्यूब लाइट खराब पड़ी हैं, उन्हें ठीक किया जा रहा हैं। जहां पर भी नई लगाने की जरूरत होगी, उनके लिए योजना बनाई जाएगी। शहरवासियों की हर तरह की सुविधाओं का ख्याल रखा जाता है।
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बीएन भारती, ईओ, नगर निगम पानीपतं
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