पानीपत। शहर को आवारा पशुओं से मुक्त करने के लिए नगर निगम कई बार अभियान चला चुका है लेकिन पूरी कामयाबी नहीं मिल सकी। अब सर्दियों में बढ़ती धुंध में इनकी वजह से हादसों में इजाफा होने की आशंका है। आंकड़ों की बात करें तो चार माह में अब तक करीब 700 पशु नैन गोशाला भिजवाए जा चुके हैं लेकिन अभी भी शहर में इनकी तादाद तीन हजार से भी ज्यादा है।
इन आवारा पशुओं की वजह से कई लोग अब तक जान तक गंवा चुके हैं। राजनीतिक दल धरना प्रदर्शन के साथ मेयर के घर का घेराव भी कर चुकें हैं लेकिन शहरवासियों को इनसे मुक्ति नहीं मिल सकी। शहर में जीटी रोड से लघु सचिवालय तक, गोहाना रोड से असंध और बरसत रोड तक इनका बोलबाला है। सबसे ज्यादा आवारा पशु औद्योगिक सेक्टरों की तरफ नजर आते हैं। सेक्टर 25 के दोनों भाग, सेक्टर 29 के दोनों भाग समेत काबड़ी रोड से जुड़े इंडस्ट्रियल एरिया में सैकड़ों की तादाद में ये नजर आते हैं।
पशु पकड़ने वाली टीम में कर्मचारी कम
नगर निगम की जो टीम रात में पशुओं को पकड़कर नैन गोशाला में भिजवाने का काम करती है, उसकी मैनपावर कम है। इस टीम में केवल चार से पांच कर्मचारी हैं। एक पशु पकड़ने वाले गाड़ी भी है। पूरी रात मशक्कत करने के बाद ये टीम पांच तो कभी दस पशुओं को ही पकड़ पाती है।
सड़कों पा गंदगी और पॉलिथीन खाने को मजबूर
शहर में घूम रहे इन बेसहारा पशुओं को रखने के लिए जगह और खाने के लिए चारा भी नहीं है। जिससे ये पशु रोजाना सड़कों, कॉलोनियों, बाजारों, व खुले मैदानों में घूम कर कूड़े कर्कट के ढ़ेर से गंदगी को खाने पर मजबूर हैं। चारे के अभाव में गंदगी व पॉलिथीन खाने से पशुओं में बीमारी फैल रही है, जिनसे उनकी मौत तक हो जाती है।
बनाएंगे कमेटी जो लेगी एक्शन
शहर से बेसहारा पशुओं को गोशाला में भिजवाने के लिए पार्षदों और निगम अधिकारियों से विचार-विमर्श कर एक कमेटी बनाई जाएगी। जो इस काम की पूरी देखरेख कर सके। शहर में घूमने वाले इन पशुओं से लोगों को हादसों का भी डर बना रहता है। वहीं, गंदगी व पॉलिथीन खाने से इनकी मौत तक होती है। सभी पशुओं को गोशाला भिजवाने का प्रबंधन किया जाएगा। इसके बाद सभी समस्याओं का हल हो पाएगा। -दुष्यंत भट्ट, सीनियर डिप्टी मेयर, नगर निगम, पानीपत।
पानीपत। तहसील कैंप रोड पर घुमती हुई बेसहारा पशु।- फोटो : Panipat