पानीपत। जिले में तापमान लगातार 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंचने और तेज गर्म हवाएं चलने के बावजूद किसान खरीफ सीजन की प्रमुख फसल धान की तैयारी में जुटे हुए हैं। गेहूं की फसल कटने के बाद खेतों में तेजी से अगली बुवाई की गतिविधियां शुरू हो गई हैं।
किसान इस समय धान की सीधी बिजाई, धान की नर्सरी, पशु चारे और मौसमी सब्जियों की खेती की ओर बढ़ रहे हैं। कृषि विभाग के अनुसार जिले में करीब 75 से 80 हजार हेक्टेयर में धान की रोपाई की जाती है, जबकि इस बार लगभग 30 हजार एकड़ क्षेत्र में धान की सीधी बिजाई का लक्ष्य रखा गया है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि धान की सीधी बिजाई तकनीक से जहां भूजल संरक्षण में मदद मिलती है, वहीं किसानों की लागत भी कम होती है। इसके साथ ही मक्का, बाजरा, ज्वार और हरे चारे की बुवाई भी तेजी से शुरू हो चुकी है।
तेज गर्मी से खेतों में घट रही नमी
भीषण गर्मी और लू के कारण खेतों में नमी तेजी से कम हो रही है, जिससे फसलों की देखभाल चुनौतीपूर्ण हो गई है। ऐसे में विभाग ने किसानों को सुबह और शाम के समय ही सिंचाई करने की सलाह दी है।
किसानों को फसल में अनावश्यक पानी भराव से बचने, नर्सरी की नियमित निगरानी करने और सब्जी उत्पादन में ड्रिप सिंचाई व मल्चिंग तकनीक अपनाने की सलाह दी जा रही है।
किसानों को धान की सीधी बिजाई, संतुलित उर्वरक प्रयोग और जल संरक्षण तकनीकों को अपनाने के लिए लगातार जागरूक किया जा रहा है। वर्तमान मौसम को देखते हुए खेतों में नमी प्रबंधन और समय पर सिंचाई बेहद जरूरी है। किसी भी समस्या की स्थिति में किसान कृषि अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं। - डॉ. देवेंद्र कुहाड़, उपमंडल अधिकारी, कृषि विभाग, पानीपत।
खेतों में तैयार की जा रही धान की नर्सरी।