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दम तोड़ते उद्योगों को सुविधा की दरकार

Fri, 20 Nov 2015 12:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/पानीपत
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दो हजार करोड़ का वार्षिक टर्न ओवर वाला मध्यम उद्योग सरकार की अनदेखी का शिकार हो रहा है। इंडस्ट्री को न तो पर्याप्त बिजली मिल पा रही है और न ही पर्याप्त लेबर मिल पाती है।
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सरकार की मनरेगा व राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा जैसी योजना मजदूरों को तोड़ रही हैं। उद्यमी इसको लेकर खासे परेशान हैं और सरकार के सामने कई बार अपनी मांग रख चुके हैं।

पानीपत में मध्यम उद्योग की करीबन सौ यूनिट हैं। इनका एक्सपोर्ट व डोमेस्टिक बाजार करीब दो हजार रुपये का है। करीब 50 हजार श्रमिक इन उद्योगों में काम करते हैं।
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इनमें मुख्यत कंबल, मिंक, स्पीनिंग मिल, ऑटोमेटिक पावरलूम आती हैं। मध्यम उद्योग के सामने एक नहीं अनेक समस्याएं हैं। इन समस्याओं का आज तक समाधान नहीं हो सका है और उद्योग आगे नहीं बढ़ पा रहा है।

कारीगर व लेबर की समस्या: मध्यम उद्योग के सामने सबसे बड़ी समस्या कारीगर व लेबर का न मिलना है। उद्योगपतियों का मानना है कि मनरेगा व खाद्य सुरक्षा योजना जैसी योजनाओं के आने पर श्रमिक काम करने को राजी नहीं है। जिसके चलते उद्योग लगातार पिछड़ रहा है।

बिजली का झटका: मध्यम उद्योग को बिजली का झटका लग रहा है। उद्योगों को एक तो पर्याप्त बिजली नहीं मिल पाती और दूसरा महंगी मिलती है।

उनको महंगी बिजली खरीदने के बाद भी जनरेटर का सहारा लेना पड़ता है। ऐसे में किसी भी उत्पाद पर कॉस्ट बढ़ जाती है।

ट्रांसपोर्ट की समस्या गहरी: पानीपत के एक्सपोर्टर के सामने एक बड़ी समस्या ट्रांसपोर्ट की है। यहां के उद्यमियों को माल को बाहर भेजने के लिए गन्नौर डिपो में भेजना होता है।

यहां पर सप्ताह में दो बार ही ट्रेन मिल पाती है। उद्यमी ट्रक से माल को भेजे तो उनको किराया व समय ज्यादा देना पड़ता है।

उद्योग को स्टेबलिटी नहीं मिल पाती। वे रॉ मैटीरियल के हिसाब से कास्ट तय करते हैं तो डॉलर की मार पड़ जाती है। सरकार लेबर के रेट तो तय कर देती है, लेकिन लेबर नहीं दे पा रही। मनरेगा जैसी योजनाओं के बाद इंडस्ट्री को लेबर नहीं मिल पाती। एक्सपोर्ट हाउस में 90 प्रतिशत के काम कम हुए हैं।
सुखमाल जैन, एक्सपोर्टर, पानीपत।

उद्योगों को बिजली नहीं मिल पाती और वह भी महंगी मिलती है। उनको ऐसे में जनरेटर का सहारा लेना पड़ता है। जनरेटर से कोई भी उत्पाद महंगा बनता है। एक्सपोर्टर को पानीपत से ट्रांसपोर्ट भी नहीं मिल पाता। बैंकों का रेट ऑफ इंटरेस्ट काफी हाई है। सरकार की योजना भी कहीं न कहीं उद्योग को प्रभावित कर रही हैं।
रामनिवास गुप्ता, पूर्व प्रधान, एक्सपोर्ट एसोसिएशन पानीपत।

इंडस्ट्री को सबसे बड़ी समस्या लेबर की हो रही हैं। उनको लाख प्रयासों के बाद भी लेबर नहीं मिल पाती। सरकार भी इस दिशा में कुछ नहीं सोच रही। सरकार को मनरेगा जैसी योजनाओं को इंडस्ट्री से जोड़ देना चाहिए। इसमें आधा वेतन सरकार व आधी वेतन उद्यमी दें। ऐसा कुछ होने पर इंडस्ट्री बढ़ सकती है।
सुरेश गर्ग, एक्सपोर्टर, पानीपत।

इंडस्ट्री के सामने बिजली की सबसे बड़ी समस्या है। मंदे के चलते माल बेच पाना मुश्किल है और ऊपर से बिजली के फिक्स रेट हैं। ऐसे में उद्योगों को आगे बढने का मौका नहीं मिल पा रहा। उद्योग इन्हीं समस्याओं में उलझकर रह जाता है। सरकार विदेशी कंपनियों को लाने की बात कर रही है, लेकिन सरकार को उससे पहले स्थानीय उद्योगों को तो सहारा देना चाहिए।
लक्ष्मी नारायण गुप्ता, एक्सपोर्टर पानीपत।

उद्योग एक नहीं बल्कि कई-कई समस्याओं से जूझ रहे हैं। वे कई बार सरकार के सामने अपनी बातों को रख चुके हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पाता। उद्योगों को सहारा दिए बिना राजस्व नहीं बढ़ सकता।
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एसएच धम्मू, एक्सपोर्टर, पानीपत।
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