समालखा। निरंकारी संत समागम में तीन दिवसीय 77वें वार्षिक निरंकारी संत समागम की समीक्षा की गई। प्रवचन के बाद नमस्कार की बेला में लाखों अनुयायियों ने घंटों लाइन में लगकर सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इनमें 16 देशों से करीब दो हजार अनुयायी शामिल हुए। उन्होंने यहां अलग-अलग कार्यों के संचालन में अपना सहयोग किया।
सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज ने कहा कि परमात्मा असीम है और इससे जुड़ने वाला हर पहलू असीम होता है। ब्रह्मज्ञान द्वारा परमात्मा को जानने के उपरांत जब हम इससे जुड़ते हैं तो जीवन के हर क्षेत्र में सकारात्मक विस्तार होता चला जाता है। उन्होंने समागम कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि समाज में जाति, जीवनशैली और निवास स्थान जैसे मुद्दों को लेकर भेदभाव होता है, जबकि ब्रह्मज्ञानी संत समदृष्टि के भाव से इन संकीर्णता से ऊपर उठकर जीवन जीते हैं। परमात्मा भोले भाव से रीझता है। चेतन और सजग रहते हुए भक्त भ्रम और भ्रांतियों से प्रभावित नहीं होते। उन्होंने श्रद्धालुओं से समागम में ग्रहण शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया। इसके पूर्व समागम समिति के समन्वयक जोगिंदर सुखीजा ने सतगुरु माता व निरंकारी राजपिता का साध संगत की ओर से आभार प्रकट किया।
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बहुभाषी कवि दरबार अद्वितीय रचनाओं का संगम
निरंकारी संत समागम का मुख्य आकर्षण बहुभाषी कवि दरबार रहा। जिसमें देश-विदेश के 19 कवियों ने विस्तार-असीम की ओर विषय पर हिंदी, पंजाबी, मुल्तानी, हरियाणवी और अंग्रेजी भाषाओं में प्रेरणादायक ज्ञानवर्धक रचनाएं प्रस्तुत कीं। इसके अतिरिक्त बाल कवि दरबार और महिला कवि दरबार जैसे आयोजन भी समागम की विशेषताएं रहीं। जिनमें बाल कवियों और कवयित्रियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से भावनाओं को अभिव्यक्त किया।
लंगर में सारा संसार एक परिवार नजर आया
समागम परिसर में श्रद्धालुओं के लिए चार मैदानों में लंगर सेवा की व्यवस्था की गई। जिसमें एक साथ 20 हजार संतों ने प्रसाद ग्रहण किया। दिव्यांगों और वृद्धों के लिए विशेष व्यवस्था की गई। पर्यावरण के प्रति जागरूकता रखते हुए भोजन स्टील की थालियों में परोसा गया। लंगर के माध्यम से सारा संसार एक परिवार जैसा नजर आया। जिसमें विभिन्न संस्कृतियों और धार्मिकता से जुड़े श्रद्धालुओं ने एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण किया।