फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Panipat News: शहर में निकासी और न ही यमुना में लगी ठोकर, ड्रेन नंबर-2 का ध्यान ही नहीं

विज्ञापन
विज्ञापन
पानीपत। प्रशासन मानसून को लेकर मैराथन बैठक और निरीक्षण कई बार कर चुका है। अधिकारी भी व्यापक प्रबंध करने का दावा अपनी रिपोर्ट में कर रहे हैं। इन सबके बीच शहर के नालों व सीवर से लेकर यमुना नदी और ड्रेन नंबर-दो की स्थित हटकर हैं। शहर के सीवर व नालों की भी आधी अधूरी सफाई हो पाई है। यमुना में अब तक ठोकर नहीं लगाई जा सकी हैं। ठेकेदार को पक्की ठोकर लगाने के लिए पत्थर तक नहीं मिल पा रहे हैं। ड्रेन नंंबर-दो की तरफ किसी का भी ध्यान नहीं है। यमुना में उफान आने के बाद खोजकीपुर गांव के नजदीक यमुना का पानी ड्रेन नंबर-दो में आ जाता है। इसके किनारे अब भी कच्चे हैं। ऐसे में यमुना के अलावा ड्रेन नंबर-दो के साथ लगते ग्रामीणों को भी बाढ़ आने पर फिर से पिछले साल की कहानी दोहराने का डर सता रहा है।
विज्ञापन

मानसून दस्तक दे चुका है। पिछले दिनों तेज बारिश ने कई जगह पानी निकासी के प्रबंधों के दावे खोल दिए थे। पिछले कई दिनों से बारिश का मौसम बन रहा है, लेकिन बादल हर रोज सूखे उतर जाते हैं। मौसम विशेषज्ञों ने अगले दिनों तेज बारिश का अनुमान जताया है। अमर उजाला ने शहर के नालों व सीवर के साथ यमुना और ड्रेन नंबर-दाे की स्थिति को जाना। ड्रेन नंबर-दो की तरफ किसी अधिकारी का ध्यान नहीं है। यह जिले की उत्तर दिशा में स्थित ददलाना गांव से शुरू होकर पूर्व दिशा स्थित खोजकीपुर गांव के नजदीक यमुना में आता है।
बॉक्स

पत्थरों की कमी के चलते नहीं लग पाई नई व पुरानी ठोकर

सनौली। सिंचाई विभाग द्वारा यमुना नदी के तटबंध पर विभिन्न गांवों में करीब 15 करोड़ रुपये की लागत से पत्थरों की 12 पुरानी व 12 नई ठोकर लगानी थी। लोकसभा चुनाव की आचार संहिता के चलते टेंडर करने में देरी हुई। अब पत्थरों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। ठेकेदार को यमुना में ठोकर लगाने के लिए कहीं पर भी पत्थर नहीं मिल पा रहे हैं। अब तक खोजकीपुर व हथवाला गांव में पत्थरों की करीब आठ ही तारों से पिचिंग कर ठोकर लगाई हैं। ये पिछले साल 2023 में लगनी थी, लेकिन यमुना में पानी आने पर नहीं लगाई जा सकी थी। इस बार पहले पिछले साल लगाई जाने वाली ठोकरों को लगाया गया है।24 नई व पुरानी ठोकर पत्थरों की कमी के चलते नहीं लग पाई हैं। यह पत्थर चरखी दादरी से आता है और इस बार पत्थरों की पानीपत के अलावा सोनीपत, करनाल व अंबाला जिलों में भी मांग है। ऐसे में किसी भी स्थिति से निपटने के लिएप्लास्टिक के कट्टों में मिट्टी भरी जा रही है। राणा माजरा, तामशाबाद व नवादा गांव के नजदीक कट्टों को लगाया गया है। हम बता दें कि पिछले साल 11 जुलाई को यमुना का तटबंध टूटने से आई बाढ़ में करीब दो दर्जन गांव प्रभावित हुए थे।
विज्ञापन


ग्रामीणों में भारी रोष
राणा माजरा गांव के सरपंच प्रतिनिधि खुर्शीद अहमद, पत्थरगढ़ के सरपंच सालीम अहमद, नवादा के सरपंच जोगिंद्र वाल्मीकि व तामशाबाद के सरपंच प्रतिनिधि गोविंद ने बताया कि सिंचाई विभाग के अधिकारियों की ढील के चलते ठोकर नहीं लग पाई हैं। अब मिट्टी के कट्टों का सहारा लिया जा रहा है। इनसे बाढ़ का पानी रोक पाना मुश्किल होगा। ऐसी स्थिति में गांव डूबने पर कोई जिम्मेदारी नहीं लेगा।
वर्जन :
इस बार चुनाव आचार संहिता के चलते टेंडर की परमिशन देरी से मिल पाई थी। ठेकेदारों ने पत्थर लगाने शुरू कर दिए हैं। अब पत्थर की मांग बढ़ने पर सप्लाई लगातार नहीं मिल पा रही है। लोगों की सुरक्षा को देखते हुए कट्टों में मिट्टी भरकर रखे हैं।
विज्ञापन

सुरेश कुमार, एक्सईएन, सिंचाई विभाग।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें