पानीपत। सेक्टर 25 से गुजरने वाली शहर की मुख्य सीवरेज लाइन को बदलवाने के लिए सरकार से अब तक 109 करोड़ रुपये के बजट की मंजूरी नहीं मिल पाई है। जिसकी वजह से आधे शहर की निकासी पर संकट के बादल छाए हुए हैं। वहीं, धंसी सीवर लाइन और इसके मेनहोल से हर वक्त हादसों का भी डर बरकार है। मुख्य सीवर लाइन के धंसे मेनहोल
में से मंगलवार सुबह क्रेन की मदद से रात को गिरी बाइक को निकाला गया। जो युवक रात को गड्ढ़े में गिरा था अपनी बाइक लेकर चला गया। हालांकि युवक को भी इस हादसे में काफी चोटें आई हैं, उसकी बाइक भी दुर्घटनाग्रस्त हुई है।
उधर सुरक्षा के मद्देनजर निगम ने मौके पर पहरेदारों की संख्या को बढ़ा दी है। गड्ढ़े के दस मीटर दोनों ओर बेरिकेडिंग लगाई है जबकि गड्ढ़े के पास शीट लगाकर उसे चारों ओर से ढक दिया गया है ताकि कोई भी उसके नजदीक न जा सके। निगम ने अब तेजी से गड्ढ़े को सुखाने का काम चालू कर दिया है। छह फुट वर्गाकार सीवर लाइन को किसी भी हालात में रोका नहीं जा सकता। केवल इसके गंदे पानी के बहाव को रूट डायवर्ट कर कम किया जा सकता है।
इसके लिए निगम ने तीन जगहों पर रूट डायवर्जन बनाया है। इसके बाद भी गड्ढ़े में सीवर का पानी बह रहा है। अब निगम बहती लाइन में एक बांध रूपी शीट लगाएगा। जिससे बहाव रूकेगा। इसके बाद रात के समय सीवर लाइन में पानी के बहाव का वेग कम होने पर धंसे मैनहोल की दीवार को बनाया जाएगा। ये काम अब तीन दिन के अंदर पूरा किया जाएगा। गौरतलब है कि सोमवार रात को इस गड्ढ़े में तहसील कैंप निवासी ब्रह्मदत्त बाइक समेत गिर गया था। गनीमत रही कि ब्रह्मदत्त की जान बच गई। उसे रात को ही निकाल लिया गया जबकि उसकी बाइक गड्ढ़े में ही रह गई थी। जिसे सुबह निकाला गया है।
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मुख्य सीवरेज लाइन आधे शहर की निकासी की लाइफलाइन
आधे शहर की निकासी करने वाले ये मुख्य सीवरेज लाइन जीटी रोड से होते हुए सनौली रोड से होकर बबैल नाका और बाइपास के साथ सिवाह एसटीपी प्लांट तक जाती है। इस एरिया में इसकी लंबाई करीब 11 किलोमीटर है। वार्ड नंबर एक से लेकर 16 तक की निकासी इस पर निर्भर है। विशेष तौर पर बबैल नाके से लेकर सिवाह सीटीपी प्लांट तक की लाइन करीब 30 साल पुरानी है। जो पिछले सवा साल में सात बार धंस चुकी है। इससे पहले भी इस लाइन के लीक होने की वजह से यहां धंसी जमीन में 25 से 30 फुट तक गहरे और 20 से 25 फुट चौड़े गड्ढे हो चुके हैं। पहले वाले गड्ढों को निगम ने सीआईपीपी तकनीक से बंद तो कर दिया था लेकिन अबकी बार सीवरेज लाइन के मैनहोल को चलती लाइन में रिपेयर करना निगम इंजीनियरों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। पुरानी होने की वजह से इसका कंक्रीट अब झड़ने लगा है। इसके डिजाइन से लेकर उसकी गुणवत्ता शक्ति भी अब पूरी हो चुकी है। निगम ने इस खस्ताहाल सीवर लाइन को बदलवाने के लिए सरकार को 109 करोड़ का प्रोजेक्ट बनाकर भेजा था। जिसे अब तक मंजूरी नहीं मिली है।
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सवा साल में सात बार धंसी सीवर लाइन
पिछले करीब सवा साल की समयावधि के दौरान ये लाइन सात बार धंसी है। सबसे पहले अगस्त 2023 फिर अक्तूबर 2023 फिर जनवरी 2024, फिर अगस्त 2024 में ये सीवर लाइन की जमीन धंसी। चार बार बड़े गड्ढे हुए। इसके बाद अगस्त और सितंबर में भी दो बार जमीन धंसी जिसमें कम गहरे गड्ढ़े बने। अब अक्तूबर 2024 में सीवर लाइन का मैनहोल ही धंस गया। जिसमें बाइक सवार बाइक समेत तक गिर गया। खास बात ये है कि इससे पहले धंसी जमीन से हुए गड्ढे को भी एजेंसी ने सही तरीके से नहीं भरा। इसे आसपास के कूड़े कर्कट से ही भरा गया है।
वर्जन:
बाइक निकलवा दी गई है। सुरक्षा के लिए गड्ढ़े के चारों ओर शीट लगाई गई है। बेरिकेडिंग और मजबूत की गई है। मौेके पर पहरेदारों की संख्या बढ़ाई गई है। अब तीन दिन के भीतर इसकी रिपेयरिंग पूरी करने के लिए प्रयासरत हैं।
राजेश कौशिक, एक्सईएन, नगर निगम।