प्रांत स्तरीय बैठक में चर्चा करते लघु उद्योग भारती के प्रदेशाध्यक्ष शुभ आदेश मित्तल, महासचिव मन
पानीपत। लघु उद्योग भारती की प्रांत कार्यकारिणी की बैठक में पश्चिमी एशिया में तनाव से उद्योग पर पड़े असर के बीच प्रदेश सरकार द्वारा न्यूनतम मजदूरी लागू करने के बाद पैदा स्थिति पर मंथन किया। उद्यमियों ने सरकार से इसके लिए समय मांगा और ऐसा न करने पर कर्मचारियों की छंटनी करने तक के विषय पर बारीकी से चर्चा की। उद्यमियों ने साफ किया कि सबसे अधिक छंटनी महिला कर्मियों की होगी जबकि लघु उद्योग भारती महिला उद्यमिता को बढ़ावा दे रहा है।
लघु उद्योग भारती की बैठक शनिवार को पानीपत के एसडी पीजी कॉलेज स्थित कांफ्रेंस हाल में की। प्रदेशाध्यक्ष शुभ आदेश मित्तल, महासचिव मनोज रुंगटा, कोषाध्यक्ष रमन सलूजा व राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य अरुण बजाज हर विषय पर बारीकी से चर्चा की। लघु उद्योग भारती जिला पानीपत के अध्यक्ष कपिल गुप्ता ने सबका स्वागत किया। कार्यकारिणी में लघु उद्योग से संबंधित विभिन्न समस्याओं और कठिनाइयों पर विस्तृत चर्चा की और इनके हर संभव समाधानों पर विमर्श किया गया ।
सुभ आदेश मित्तल ने कहा कि प्रदेश सरकार ने न्यूनतम मजदूरी 15220 रुपये की है। यह साथ लगते प्रदेश में सबसे अधिक है। इस समय इसे लागू नहीं किया जा सकता। पश्चिमी एशिया के देशों में तनाव के चलते स्थित सामान्य नहीं रही है। उद्यमियों का माल वापस आ गया है और नए ऑर्डर नहीं मिल पा रहे हैं। कच्चा माल महंगा हो गया है और ऊर्जा का भी संकट है। इस समय लागत बढ़ी है और मांग घट गई है, ऐसे में उद्यमियों पर भार लाद दिया। उन्होंने सरकार से इसे लागू करने के लिए कुछ समय की मांग की, इसके साथ न्यूनतम मजदूरी में व्याप्त विसंगतियों को दूर करने की मांग की।
उन्होंने सरकार के प्रदूषण रोकने के लिए सीटीई और सीटीओ को अनिवार्य कर दिया है। इसका अनुपालन न करने पर जुर्माना लगाया जा रहा है। इसे उद्योग की नीति काे भली-भांती समझ लेने पर लागू नहीं किया जाए। उन्होंने कहा कि बल्लभगढ़ और फरीदाबाद में अपडेशन कामयाबी के साथ हो गया है। बाकी क्षेत्र में भी इसे शीघ्रता से किया जाएगा।
स्वदेशी नीति में 100 नई तकनीकी अपनाई
महासचिव मनोज रुंगटा ने बताया कि लघु उद्योग भारती की हरियाणा इकाई ने आईटी सेक्टर से 100 नई तकनीकी को उद्योगों के लिए अपनाया है। इसमें आठ तकनीकी आईसीआईआर से ली है। इनसे नए उत्पादों को बनाने में मदद मिली है। उन्होंने कहा कि कुछ उद्योग समय पर सरकारी आर्डर पूरे नहीं कर पा रहे। ऐसे में सरकार उन पर आर्थिक दंड अभी न लगाए। इसे कुछ समय के लिए स्थगित किया जाए। कोषाध्यक्ष रमन सलूजा ने बताया कि पश्चिम एशिया में तनाव के चलते कच्चे माल व ऊर्जा के दाम 25 से 50 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। सरकार को इस मुश्किल घड़ी में उद्योगों को योजना के तहत तत्काल सहायता राशि जारी की जाए। राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य अरुण बजाज ने सरकारी योजनाओं ऋण जैसे मुद्रा योजना और तकनीकी जानकारी के लिए विशेष कार्यक्रम कराने की मांग की। जिलाध्यक्ष कपिल गुप्ता ने कहा कि उद्यमियों की समस्याओं पर सरकार को तुरंत संज्ञान लेना चाहिए। सरकार के सहयोग से उद्योग आगे बढ़ेगा।