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Panipat News: सीपीसीबी के सीधे क्लोजर नोटिस देने के विरोध में उतरे उद्यमी, विधायक को सौंपा ज्ञापन

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शहरी विधायक प्रमोद विज को ज्ञापन सौंपते उद्यमी। स्रोत : सोशल मीडिया - फोटो : संवाद
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पानीपत। उद्यमियों ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीबीसीबी) के पर्यावरण प्रदूषण के नए मानक तय करने और फैक्टरी मालिकों को क्लोजर नोटिस देने के विरोध में उतर आए हैं। उद्यमियों के समर्थन में पानीपत डायर्स एसोसिएशन के एक प्रतिनिधिमंडल ने पानीपत विधायक प्रमोद विज से मिलकर रंगाई उद्योग से जुड़ी विभिन्न समस्याओं के बारे में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने उद्योगों को बचाने की मांग की। एसोसिएशन के प्रधान नितिन अरोड़ा ने बताया कि सीपीसीबी द्वारा रंगाई उद्योगों पर अत्यधिक सख्ती की जा रही है।
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कई यूनिटों को बिना शोकॉज नोटिस के ही क्लोजर नोटिस जारी किए जा रहे हैं, इससे उद्योगों में भारी चिंता का माहौल है। पहले एसपीएम की सीमा 800 थी। इसे घटाकर 80 किया और अब नई नोटिफिकेशन में 50 एसपीएम कर दिया है। यह वर्तमान परिस्थितियों में उद्योगों के लिए लगभग असंभव है। इससे कई फैक्ट्रियां बंद होने की कगार पर पहुंच गई हैं। कुछ को सील कर दिया गया है। इस कार्रवाई से रंगाई उद्योग में डर का माहौल बना हुआ है। इसके अलावा बैग फिल्टर लगाने के लिए सीपीसीबी द्वारा केवल कुछ कंपनियों को ही मान्यता दी है जबकि छोटे उद्योगों द्वारा बनाए गए बैग फिल्टर को स्वीकार नहीं किया जा रहा। एयर पॉल्यूशन कंट्रोल डिवाइस (एपीसीडी) लगाने के लिए भी नई गाइडलाइन जारी की गई हैं। इससे छोटे और लघु उद्योगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है। विधायक प्रमोद विज ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि इस विषय में जल्द ही हरियाणा के पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह से मुलाकात करेंगे। वे उद्यमियों को साथ लेकर जाएंगे। आवश्यकता पड़ने पर मुख्यमंत्री के साथ भी बैठक कराएंगे। इंडस्ट्री को बंद नहीं होने दिया जाएगा और वे उद्योग के साथ कदम से कदम मिलाकर पूरा सहयोग करेंगे। इस अवसर पर शिव मल्होत्रा, भीम राणा, भारत बांगा, अंकुर गुप्ता, राजपाल, रामप्रताप, डॉ. अनिल, नवीन बंसल और लक्की गुंबर, बीरभान सिंगला व अजय मालिक उपस्थित रहे।
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उद्यमियों ने ये रखी मांग
-छोटे, लघु और अति लघु उद्योगों को इन नियमों से छूट दी जाएं।
-बड़े उद्योगों को नए नियम लागू करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए।
-पर्यावरण संबंधी उपकरण लगाने के लिए सरकार द्वारा सब्सिडी प्रदान की जाए। इससे उद्योग पर्यावरण मानकों का पालन कर सकें।
- पिछले आठ वर्षों से लंबित जेडएलडी परियोजना को जल्द लागू किया जाए।
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