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Panipat News: एलपीजी की आपूर्ति बंद और पीएनजी की यूनिट तय, ठंडी पड़ी उद्योगों की चिमनी

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पानीपत। पश्चिमी एशिया में तनाव की स्थिति के चलते टेक्सटाइल नगरी के उद्योगों पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। उद्योगों में बॉयलर चलाने के लिए एलपीजी की आपूर्ति बंद कर दी है और पीएनजी की यूनिट तय कर दी हैं। एक उद्योग में हर रोज 600 यूनिट तक पीएनजी चलाई जा सकेगी, इससे अधिक प्रयोग करने पर दोगुना जुर्माना लगाया जा सकता है। इस स्थिति में पानीपत के करीब 250 उद्योग प्रभावित हैं। करीब 20 उद्योगों की ताे चिमनी ठंडी भी हो चुकी है।
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बढ़ते पर्यावरण को रोकने के लिए पानीपत में उद्योगों में बॉयलर कोयले की बजाय एलपीजी और पीएनजी आधारित कर दिए थे। उद्यमियों ने आगे आकर इनको अपना लिया था। सेक्टर-29-टू और पुराना औद्योगिक क्षेत्र एलपीजी और पीएनजी आधारित उद्योग अधिक हैं। उद्यमी इसका प्रयोग कर आसानी से उद्योग चला रहे थे। उद्योगों में शनिवार को एलपीजी की आपूर्ति बंद कर दी थी। उद्यमी एक-दो दिन स्टॉक का प्रयाेग करते रहे, इसके बाद एलपीजी न होने पर उद्योग बंद होना शुरू हो गए। एलपीजी न मिलने पर 20 डाइंग यूनिट और उद्योग बंद हैं। सेक्टर-29-टू के डाइंग उद्यमी विकास चाचड़ा ने बताया कि उनकी फैक्टरी सोमवार को बंद हो गई थी, उनके पास एलपीजी के अलावा कोई विकल्प नहीं है। वे न ही इसे इतनी आसानी से बदल सकते हैं। इसको बदलने में भी मोटा पैसा खर्च होगा। सरकार को उद्योगों को देखते हुए एलपीजी की आपूर्ति सुचारु करनी चाहिए।

पीएनजी की यूनिट तय
उद्योगों में पीएनजी के प्रयोग का दायरा तय कर दिया है। एक उद्योग में 600 यूनिट तक पीएनजी का प्रयोग किया जा सकता है। एक सामान्य फैक्टरी में इसकी खपत छह से आठ घंटे में हो जाती है। किसी बड़े उद्योग में यह बड़ी चिंता है। वहीं केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और वायु गुणवत्ता मैनेजमेंट आयोग (सीएक्यूएम) ने धुएं का मापदंड भी कम कर दिया है। पहले 800 एसपीएम पर उद्योग चला सकते थे। इसको घटाकर 80 और अब 50 एसपीएम कर दिया है। उद्योगों में एपीसीडी उपकरण लगाने की बात कही जा रही है। किसी भी उद्योग में इतनी जगह नहीं है, इसके अलावा इस उपकरण को लगाने में 20 से 25 लाख रुपये की लागत आएगी। पानीपत डायर्स एसोसिएशन के प्रधान नितिन अरोड़ा ने बताया कि उद्योगों के साथ नर्मी बरती जाए। एलपीजी या पीएनजी का प्रयोग करने की छूट दी जाए। डाइंग उद्योग टेक्सटाइल फैक्टरी की रीढ़ होती है, इसे कमजोर करने की बजाय मजबूत बनाने की जरूरत है। चाहे बैक फिल्टर जितने भी अच्छे लगा दो, सीधा सा संकेत है डाई हाउस बंद होने के कगार पर आ चुके हैं, प्रतिदिन पॉल्यूशन की टीम छापा मारी करती है, बहुत परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जबकि रंगाए उद्योग से ही निर्यात और घरेलू टेक्सटाइल चलते हैं।
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