पानीपत। डाइंग उद्योग पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और एक्यूआईएम की पर्यावरण प्रदूषण के मामले में सख्ती के विरोध में उद्यमी लामबंद हो गए हैं। डाइंग उद्योग से जुड़े उद्यमियों ने आरोप लगाया कि नियमों के पालन के नाम पर डाइंग यूनिट को लगातार सील किया जा रहा है। सीबीसीबी ने छह महीने में ही नए नियम लागू कर दिए हैं।
आरोप हैं कि धुएं के मापदंड में पहले 800 एसपीएम तय था। इसे फिर 80 और अब घटाकर 50 कर दिया है। इन नियमों में डाइंग यूनिट चला पाना मुश्किल हो जाएगा। डाइंग उद्यमियों ने मजबूरीवश पलायन करने की बात कही है। पानीपत डायर्स एसोसिएशन के बैनर तले उद्यमियों की एक बैठक सोमवार को एक होटल में की। इसकी अध्यक्षता प्रधान नीतिन अरोड़ा ने की। उद्यमियों ने बैठक में पिछले दिनों की कार्रवाई व नए नियमों पर चर्चा की। उद्यमियों ने कहा कि सीपीसीबी और एक्यूआईएम ने इंडस्ट्री पर कार्रवाई तेज कर दी हैं।
डाइंग यूनिट को सील किया जा रहा है। इनमें से कई नॉर्म्स पूरे थे। सीपीसीबी हर छह महीने के बाद एक नया नियम लागू कर रहा है। नए नियम अनुसार धुएं का मापदंड लगातार घटाया जा रहा है। इसे अब 50 एसपीएम कर दिया है। यह बहुत मुश्किल है। उद्यमी बैक फिल्टर अच्छे लगाकर भी इस मापदंड को पूरा नहीं कर सकते। यह डाई हाउस उद्योग को बंद करने का रास्ता है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम हर रोज छापामारी कर रही हैं। यूनिट को सील कर दिया जाता है। ऐसे में बहुत परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस माैके पर भीम राणा, बीरभान सिंगला, नीरज बंसल, रामप्रताप, आशीष गर्ग, पुनीत जैन, भारत बांगा, अंकुर गुप्ता, राजेश जैन, शिव मल्होत्रा आदि माैजूद रहे।