इसराना। प्रशासन स्वच्छता अभियान एक जनवरी से चलाने की तैयारी में है। इसराना उपमंडल में इसके उलट हो रहा है। यहां सार्वजनिक शौचालयों पर चार साल से लटका ताला आज तक नहीं खुल पाया है। अब दुकानदारों ने इनके आगे स्टॉल लगाकर कब्जा जमा लिया है। ऐसे में लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
इसराना में मार्केट कमेटी की जमीन पर स्वच्छ भारत अभियान के तहत लोगों की मांग पर डीआरडीए की ग्रांट से पंचायत विभाग द्वारा साढ़े चार साल पहले सार्वजनिक शौचालय बनाए गए। इनको आज तक नहीं सुचारु नहीं किया गया। यहां दरवाजों पर ताले लटके हुए हैं। नवनिर्मित सार्वजनिक शौचालय के आगे दुकानदारों ने स्टाल लगा कब्जा जमा लिया है। सार्वजनिक शौचालय के ऊपर रखी गई पानी की टंकी व अंदर वाशबेसिन व अन्य सामान बिना उपयोग के कंडम हो रहा है। सार्वजनिक शौचालय से गंदे पानी की निकासी स्थानीय प्रशासन के लिए सिरदर्द बनी हुई है।
इस संबंध में लोग प्रशासन से पूछ रहे हैं कि उन्हें सार्वजनिक शौचालय की सुविधा कब मिलेगी। ग्रामीण देवेंद्र जागलान, बलराज जागलान, जय सिंह घनघस, सुखचैन कुंडू, सुनील कुमार, राजरूप फौजी, आजाद सिंह, सुदेश, नीलम व बिमला ने बताया कि इसराना को सब डिवीजन का दर्जा तो मिल गया है लेकिन इसराना बाजार में काम से आए लोगों को आज भी लघुशंका के लिए भटकना पड़ता है। साढ़े चार साल पहले बनाए गए सार्वजनिक शौचालय पर ताला लटका हुआ है। सार्वजनिक शौचालय तो बनाया गया लेकिन उसकी दूषित पानी की निकासी नहीं होने की बात कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं। विशेष कर बुजर्गों व महिलाओं को बंद पड़े नवनिर्मित शौचालय की वजह से परेशानी उठानी पड़ती है। ऐसे में लोगो को लघुशंका खुले में जाना पड़ रहा है जबकि महिलाओं को आसपास के घरों में जाना पड़ रहा है। अब हालात ये हो गई है कि सार्वजनिक शौचालय के आगे दुकानदारों ने स्टाल लगा कब्जा जमा रखा है। प्रशासन को चाहिए कि नवनिर्मित शौचालय के ताले खुलवाए। ताले लगने से सार्वजनिक शौचालय सफेद हाथी बन कर राह गया है।
वर्जन :
पुरानी मंडी में सार्वजनिक शौचालय को शुरू कराने के लिए गंदे पानी की निकासी की समस्या बनी हुई हैं। यहां गड्ढा सिस्टम बनाकर वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है। जल्द ही काम शुरू करा कर समस्या का समाधान करा दिया जाएगा।
विवेक कुमार, बीडीपीओ इसराना।