सर्दी शुरू होते ही जिले में बिजली की खपत करीब 45 प्रतिशत तक बढ़ गई है। ऐसे में हर रोज करीब 20 लाख यूनिट अतिरिक्त बिजली खर्च हो रही हैं।
बिजली खपत बढ़ने का कारण रूम हीटर, गीजर और घरों में लगने वाली रॉड लगाना माना जा रहा है। ऐसे में लाइनों में भी फाल्ट आना शुरू हो गया है। इससे अघोषित कटौती शुरू हो गई है।
सर्दी शुरू होते ही जिले में बिजली संकट गहराना शुरू हुआ है। 10 नवंबर तक जिले में बिजली की प्रतिदिन की खपत करीब 45 लाख यूनिट प्रतिदिन थी।
दिसंबर माह के शुरू होते ही बिजली खपत में इजाफा होकर 60 लाख यूनिट प्रतिदिन तक पहुंच गई। इसके बाद से प्रतिदिन बिजली की खपत में इजाफा जारी है।
आंकड़े बताते हैं कि जैसे-जैसे पारा गिरा वैसे-वैसे बिजली की खपत बढ़ती गई। पांच दिसंबर को जिले का न्यूनतम तापमान आठ डिग्री आंका गया।
इस दिन बिजली की खपत 66 लाख यूनिट थी। इसके बाद न्यूनतम पारा चढ़ा और बिजली की रोजाना की खपत 62- 64 लाख यूनिट रह गई।
15 दिसंबर को जिले में सबसे ठंडा दिन दर्ज किया गया। इस दिन न्यूनतम तापमान 4.5 डिग्री सेल्सियस रहा और बिजली की खपत करीब 71 लाख यूनिट रही। गर्मियों में जिलेभर में रोजना बिजली की खपत करीब 85 लाख यूनिट तक पहुंच जाती है।