पानीपत। गोबर प्रबंधन नीति के तहत अवैध डेयरियों पर दस हजार रुपये के चालान और पशुओं को जब्त करने का डर आखिरकार रंग दिखाने लगा है। 30 के बाद अब पंजीकरण की संख्या का आंकड़ा 150 पार तक पहुंच चुका है। हालांकि इसके लिए निगम को करीब 300 डेयरी संचालकों को नोटिस देने पड़े। वहीं, निगम अधिकारियों का कहना है कि उनका मकसद चालान काटना नहीं बल्कि लोगों को जागरूक करने का है। ताकि गोबर प्रबंधन नीति को सिरे चढ़ाया जा सके। अगर इसके बाद भी लोग जागरूक नहीं होंगे तो निगम को मजबूरन सोमवार से चालान भी काटने पड़ेंगे।
बता दें कि इस नीति को लेकर निगम ने शहर के अवैध डेयरी संचालकों को निगम में अपनी डेयरियों के रजिस्ट्रेशन करने की अपील की थी। इसके लिए हेल्पलाइन नंबर व ई-मेल तक जारी करते हुए एक माह का समय दिया गया था। पंजीकरण के लिए निगम की वेबसाइट पर फॉर्म उपलब्ध करवाए गए हैं। वहीं, शहरवासियों से इस पर सुझाव, शिकायत व सूचना के लिए निगम ने हेल्पलाइन नंबर 90344-20507 भी जारी किया हैं। इसके अलावा निगम के ई-मेल सैनिटेशन एमसीपी डॉट जीमेल डॉट कॉम पर भी संपर्क कर रजिस्ट्रेशन करवाने का आग्रह किया जा सकता है।
इसलिए बनाई थी नीति
निगम के अनुसार, शहर में चल रही अवैध डेयरियों से निकलने वाले गोबर को डेयरी संचालक नालियों व सीवर में बहा देते हैं। इससे नालियां व सीवर चोक हो जातेे हैं। गोबर से मीथेन गैस निकलती है, जोकि सफाई कर्मचारियों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। कई बार सीवर साफ करने वाले इस गैस की चपेट में आ जाते हैं। इन समस्याओं को देखते हुए ये नीति बनाई गई। इसमें इन डेयरियों से निकलने वाले गोबर को वैज्ञानिक तकनीक से उपयोग में लाया जा सकता है। इससे शहर में साफ सफाई भी रहेगी और निकासी व्यवस्था जाम भी नहीं होगी।
पहले चालान नहीं, जागरूक करना है जरूरी: सफाई शाखा
शहर में करीब 300 अवैध डेयरियों को नोटिस दिए गए हैं। अब लोग जागरूक होकर पंजीकरण भी करवा रहे हैं। हमारी प्राथमिकता पहले चालान करने की नहीं लोगों को जागरूक करने की है। अगर लोग जागरूक नहीं हुए तो मजबूरन चालान भी किए जाएंगे। बिना पंजीकरण वाली डेयरियों से दस हजार रुपये का जुर्माना वसूला जाएगा। जुर्माना न देने की सूरत में डेयरियों के पशुओं को जब्त कर गोशाला में छोड़ा जा सकता है। - गुरमीत सिंह, एसआई, सफाई शाखा, नगर निगम, पानीपत।