नई दिल्ली की एजेंसी सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट के तहत चलाए ग्रीन स्कूल प्रोजेक्ट में केंद्रीय विद्यालय को येलो प्रशस्ति पत्र मिला है। प्राचार्या ने येलो रैंक मिलने पर इस अभियान में भाग लेने वाले 10 शिक्षकों और 49 छात्रों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए। प्राचार्या सुनीता ने इसे श्रेय प्रोजेक्ट समन्वयक राजेश वशिष्ठ के कुशल मार्गदर्शन को दिया है। उन्होंने आशा जताई है कि इस बार स्कूल ग्रीन कार्ड का प्रशस्ति पत्र प्राप्त करेगा, इसके लिए तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं।
गौरतलब है कि सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट, नई दिल्ली देश के सभी विद्यालयों को ग्रीन स्कूल प्रोजेक्ट के तहत हरित विद्यालय बनाने के अभियान पर जुटा है। इसके तहत गत वर्ष 2018 में देश के सभी विद्यालयों में पांच मानकों पर स्वच्छता का अभियान चलाया गया था। इसमें देश के 5000 विद्यालयों ने भाग लिया था। इनका एक ऑडिट किया गया, ऑडिट के आधार पर ही स्कूलों को रैंकिंग दी गई थी। इसमें किसी भी विद्यालय के पांच मानकों को परखा जाता है, जिनमें स्वच्छ वायु अभियान, उर्जा संरक्षण, भोजन एवं पोषण अभियान, जल संरक्षण चेतना और वेस्ट मैनेजमेंट यानी कचरा प्रबंधन को शामिल किया जाता है। इन मानकों के अनुरूप स्कूलों को तीन रैंक दिए जाते हैं। जिनमें ग्रीन रैंक को सबसे बेस्ट, येलो को बेटर जबकि रेड को बेकार श्रेणी में घोषित किया जाता है। इसमें केंद्रीय विद्यालय बोहल को येलो रैंक का प्रशस्ति पत्र मिला है, जो अच्छा रैंक माना गया है।
हरित विद्यालय अभियान के तहत लगाए 58 पौधे
प्राचार्या सुनीता ने बताया कि गत वर्ष से समन्वयक राजेश वशिष्ठ के मार्गदर्शन में विद्यालय में रेनवॉटर हार्वेस्टिंग नीति, सौर ऊर्जा का प्रयोग, विद्यालय में वाहनों का सीमित प्रयोग और वेस्ट प्रबंधन नीति को अमल में लाने का प्रयास किया जा रहा है। इस बार विद्यालय पर्यावरण संरक्षण संबंधी क्षेत्रो में सुधार करते हुए ग्रीन प्रशस्ति पत्र हासिल करेगा। इसके तहत विद्यालय में 58 छायादार और फलदार पौधे लगाए गए हैं। कार्यक्रम में स्वच्छ हवा अभियान प्राथमिक शिक्षिका दिव्या शर्मा, वरिष्ठ शिक्षिका अनिल सेठी द्वारा ऊर्जा संरक्षण, सीएमपी अधिकारी सुनीति पटनायक द्वारा भोजन और पोषण अभियान, डॉक्टर अंजू चतुर्वेदी की ओर से जल संरक्षण चेतना और नीतू की टीम ने वेस्ट मैनेजमेंट कार्यक्रम विद्यालय में चलाते हुए छात्रों का मार्गदर्शन किया। इस दौरान विद्यार्थियों में माही कादयान, रितु, रोहित धीमान, साहिल, सारिका, ख़ुशी रोहिल्ला, अजय राठी, यशिका, अंशिका, दिशा, तन्नु, अंशुल, लगन कौशिक, हिमांशु शर्मा, अमन रूहल, ऋषभ, दीपक, विशेष कौशिक और गौरव ने योगदान दिया जबकि बी दत्त, संदीप, उर्वशी, संदीप कोच, मंजू व अन्य उपस्थित रहे।
‘लर्निंग बाय डूइंग’ और ‘मेकिंग चेंज वर्क’ के साथ पर्यावरण संरक्षण
राजेश वशिष्ठ ने बताया कि इस ऑडिट का उद्देश्य बच्चों में ‘लर्निंग बाय डूइंग’ और ‘मेकिंग चेंज वर्क’ के साथ पर्यावरण संरक्षण की भावना पैदा करना है। सबका कर्तव्य बनता है कि भावी पीढ़ी को प्राकृतिक संसाधन देने के लिए आज जल और उर्जा का संरक्षण करें , भोजन को बर्बाद न करें , वायु प्रदूषण पर नियंत्रण करें और जो वेस्ट कूड़ा कचरा है। उसका शोधन करते हुए उसे रीडयूज, रि-साइकिल और रीयूज करना सीखें, क्योंकि वस्तुओं के पुनचक्रण से देश और पर्यावरण दोनों की सेहत पर प्रभाव पड़ता है।