समालखा विधायक रविंद्र मच्छरौली के गांव मच्छरौली स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की बोर्ड का रिजल्ट बेहद ही खराब रहा है। दसवीं के 45 विद्यार्थियों में से महज चार बच्चे ही परीक्षा में सफल हो पाए। एक जनप्रतिनिधि के गांव का रिजल्ट खराब आने से अंदाजा लगाया जा सकता है कि अन्य गांवों के सरकारी स्कूलों में स्थिति क्या है। ग्रामीण मानते हैं कि स्कूल के अध्यापकों की अंदरूनी राजनीति का नुकसान बच्चों की पढ़ाई का हुआ है। खराब रिजल्ट को लेकर अभिभावकों में भी भारी रोष है। बुधवार को वे सरपंच पति बलराज के नेतृत्व में स्कूल पहुंचकर प्रिंसिपल मधु डागर से इस बारे में बातचीत भी की।
दो दिन पहले घोषित हुए हरियाणा शिक्षा बोर्ड के दसवीं के परीक्षा परिणाम के बाद अभिभावकों में खासा गुस्सा था। स्कूल स्टाफ के साथ बैठक के दौरान शिक्षकों को इसका जिम्मेदार बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूल के टीचरों में आपस में ही खींचतान है, जिसके कारण बच्चों का भविष्य खराब हो रहा है। अभिभावक सीमा व पूनम ने सवाल उठाया कि कुछ बच्चे नहीं पढ़ते होंगे, लेकिन ये कैसे हो सकता है कि सभी बच्चे ही पढ़ नहीं रहे थे। केवल चार बच्चों का पास होना स्कूल की टीचरों की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान है।
शिक्षा मंत्री को फोन किया
सरपंच पति बलराज ने कहा कि स्कूल शिक्षकों में आपसी राजनीति चल रही है जिसके कारण बच्चों की ढंग से पढ़ाई नहीं हो सकी। उन्होंने प्रिंसिपल व अन्य स्टाफ के ट्रांसफर को लेकर शिक्षामंत्री को फोन किया, लेकिन उनके विधानसभा में होने कारण बात नहीं हो सकी। सरपंच पति ने कहा कि वह अन्य ग्रामीणों के साथ शिक्षामंत्री से मिलेंगे।
स्कूल की दसवीं कक्षा का परीक्षा परिणाम अपेक्षाकृत नहीं आया है। स्कूल स्टाफ में राजनीति के आरोप निराधार हैं। कुछ मामलों में बच्चों के अभिभावक भी इसके लिए जिम्मेदार हैं। स्कूल में शिक्षा का स्तर सुधारने का प्रयास किया जाएगा।
मधु डागर, प्रिंसिपल, राजकीय सीसे स्कूल मच्छरौली।