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जिले के 450 स्कूल रहे बंद

Sat, 07 May 2016 12:31 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला
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134-ए के दाखिलों को लेकर अभिभावकों के प्रदर्शन के बाद शुक्रवार से निजी स्कूल संचालक अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए। करीब 450 स्कूलों के बंद रहने से जिले के करीब चार लाख विद्यार्थी घर ही बैठे रहे। इससे पूर्व स्कूल संचालक लघु सचिवालय के बाहर एलिवेटिड हाईवे के नीचे एकत्रित होकर प्रदर्शन करते हुए लघु सचिवालय पहुंचे।
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हरियाणा संयुक्त विद्यालय संघ के बैनर तले शुक्रवार को जिले के सभी स्कूल संचालक 134-ए के विरोध स्वरूप अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए। प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मान की अगुवाई में स्कूल संचालक लघु सचिवालय के बाहर एलिवेटिड हाईवे के नीचे एकजुट हुए। यहां से प्रदर्शन करते हुए लघु सचिवालय पहुंचे। स्कूल संचालकों ने सरकार विरोधी नारेबाजी कर एसडीएम विवेक चौधरी को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मान, संयोजक जयपाल सैनी, महासचिव राजेंद्र शर्मा और जिला प्रधान कृष्ण नारंग ने कहा कि निजी स्कूल संचालक समाज को शिक्षित कर रहे हैं। सरकार अब उल्टे-सीधे नियम लागू कर निजी स्कूल संचालकों को दबाने का प्रयास कर रही है। स्कूलों में मान्यता लेने से लेकर आखिर तक सरकार के हर नियम का पालन किया जाता है। बावजूद इसके सरकार निजी स्कूल संचालकों को दबाने में लगी हुई है। सरकार का इसी तरह से दबाव रहा तो वे स्कूल बंद करने को मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि सरकार को 134-ए की बजाय आरटीई को लागू करना चाहिए। स्कूल संचालकों ने प्रशासन को मांगों को लागू करने तक हड़ताल जारी रखने की चेतावनी दी है।
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टीचर प्रदर्शन में शामिल, बच्चे दिनभर घर बैठे
स्कूल संचालकों के अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के बाद स्कूल स्टाफ को प्रबंधन के समर्थन में सड़कों पर उतरना पड़ा, वहीं बच्चे मजबूरीवश पढ़ाई छोड़कर घर बैठे। कुछ अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन व सरकार के बीच की लड़ाई को बच्चों के भविष्य पर खतरा बताया है।

रिजल्ट घोषित करने के बाद नहीं हुआ एक भी दाखिला
शिक्षा विभाग द्वारा 134-ए के तहत वीरवार को प्रवेश परीक्षा का परिणाम घोषित कर दिया था। जिसमें 2115 में से 545 बच्चे पास हुए थे। खंड शिक्षा अधिकारी स्तर पर शुक्रवार को पास बच्चों को स्कूल अलॉट किए जाने थे, लेकिन खंड स्तर पर किसी भी बच्चे को स्कूल अलॉट नहीं कर सके।


दाखिले नहीं होने पर यहां करेें शिकायत  
शिक्षा विभाग ने 134-ए के तहत दाखिलों को लेकर कमर कस ली है और खंड व जिला स्तर पर कमेटी गठित कर दी है। अभिभावक स्कूलों में नियमानुसार दाखिला न होने पर कमेटी को शिकायत कर सकते हैं। जिला स्तर पर गठित कमेटी के चेयरमैन जिला शिक्षा अधिकारी जयभगवान खटक को बनाया गया है। सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में एडवोकेट राममोहन राय, सरोज कुमारी, अभिभवकों की तरफ से जितेंद्र कुमार व स्कूल संचालकों की तरफ से विजेंद्र मान को शामिल किया है।


स्कूल संचालकों की छह मांग
1. नियम 134-ए की बजाय 12वीं कक्षा तक आरटीई को लागू कर दस प्रतियात की बजाय 25 प्रतिशत करीब परिवार के बच्चों को नजदीक के मनपसंद स्कूलों में सम्मानपूर्वक शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार दें। इस नियम के तहत बच्चों को न केवल फ्री शिक्षा बल्कि किताब, कॉपी, वर्दी व अन्य सुविधा भी मिलेंगी।
2. 2011 से पूर्व स्थापित सभी स्कूलों को भूमि नियमों में छूट देकर एकमुश्त मान्यता दें। इससे अधिक से अधिक बच्चे स्कूलों में दाखिला ले सकेंगे।
3. निजी स्कूलों पर लगाया गया प्रॉपर्टी टैक्स वापस लिया जाए।


4. स्कूल बसों की आयु कम से कम 20 वर्ष या किलोमीटर के आधार पर तय होनी चाहिए। चूंकि स्कूल बसें प्रतिदिन 50 किलोमीटर ही चलती हैं। ऐसे में बस दस साल में सवा लाख किलोमीटर ही चल पाती हैं। जबकि निर्माता कंपनी तीन लाख किलोमीटर की गारंटी देती है।
5. स्कूल बसों की 850 से बढ़ाकर 25,600 परमिट फीस को वापस करें।
6. निजी स्कूलों में 134-ए के नाम पर कुछ असामाजिक, उपद्रवी व अभिभावक संघ का चोला ओढ़कर स्कूलों में उत्पात मचाने वाले पर कड़ी कार्रवाई समय रहते की जाएं और स्कूल प्रबंधन व स्टाफ सुरक्षा का माहौल दिया जाए।

सख्त कदम उठाने का निर्णय
दो जमा पांच मुद्दे जन आंदोलन ने जिला स्तर पर शुक्रवार को बैठक की। जिसकी अध्यक्षता दलबीर भौसले व मीडिया प्रभारी सोकेेंद्र बालियान ने की। उन्होंने पहले शिक्षा अधिकारियों की 134- ए का रिजल्ट घोषित करने में लापरवाही व अब स्कूल संचालकों की हड़ताल को एक ही कड़ी बताया। उन्होंने कहा कि 134-ए के तहत शुक्रवार से विद्यार्थियों को स्कूल अलॉट किए जाने थे, लेकिन अधिकारियों के ढुलमुल रवैये के चलते विद्यार्थियों को स्कूल अलॉट नहीं किए गए। उन्होंने जल्द ही प्रदेश स्तर पर बैठक कर सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया।
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