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Panipat News: दिनरात मेहनत कर पूरा किया सपना, जिले से छह बने सीए

Tue, 04 Nov 2025 01:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
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पानीपत। इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) द्वारा सीए फाइनल का परीक्षा परिणाम सोमवार को जारी कर दिया। वहीं इंटर परीक्षा और सीए फाउंडेशन की परीक्षा परिणाम भी जारी कर दिया गया। जिले के छह युवाओं ने सीए फाइनल की परीक्षा पास की है। युवाओं की छह से आठ साल की मेहनत आखिरकार रंग लाई है। नंद विहार कॉलोनी के अंकित ने लगातार आठ साल की मेहनत से आखिरकार सीए बनने के अपने सपने को पूरा किया। यह अंकित का पांचवां प्रयास था, वे हर बार दो-तीन नंबर से परीक्षा में रह जाते थे। उनके पिता और भाई ने उनको उत्साहित किया और वे आखिर में सीए बने गए। वहीं नीरज गोयल ने चौथे प्रयास में सफलता हासिल की।
अंकित के पिता सुरेश कौशिक ने बताया कि वे मूलरूप से मतलौडा के वैसरी गांव के हैं। बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए वे लगभग 22 साल से परिवार के साथ नंद विहार कॉलोनी में रह रहे हैं। बचपन से अंकित का सपना सीए बनने का था। उसने दसवीं से आगे ही पढ़ाई काॅमर्स ऑनर्स से की और कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से बीकॉम और डीयू यूनिवर्सिटी से एमकॉम की है। इसके साथ ही वह सीए की परीक्षा के लिए तैयारी कर रहा था। अंकित ने इससे पहले चार बार प्रयास किया था लेकिन हर बार दो-तीन नंबर से रह जाता था। आठ साल मेहनत ने पांचवें प्रयास में रंग दिखाया और वह सीए बन गया। अंकित के सीए बनने से परिवार के सभी सदस्यों को उस पर गर्व है। सीए अंकित कौशिक ने बताया कि वह आठ साल से सीए की परीक्षा के लिए तैयारी कर रहा है। यह उनका पांचवां प्रयास था जिसमें उन्हें सफलता प्राप्त हुई।
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सीए नीरज गोयल के पिता राजेश ने बताया कि वे मतलौडा के रहने वाले हैं। नीरज पिछले छह साल से सीए की परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहा था। आखिरकार उसे सफलता मिल गई। नीरज की सफलता से पूरे परिवार में खुशी का माहौल है और नीरज पर गर्व महसूस कर रहे हैं। सीए नीरज ने बताया कि उसने 12वीं कक्षा के बाद अपने चचेरे भाई से जीवन में आगे के कॅरिअर के लिए राय मांगे तो उन्होंने ही सीए बनने की सलाह दी। फिर दिन-रात पढ़ाई की। वह सुबह छह बजे उठकर पानीपत कोचिंग के लिए आता था और रात आठ बजे घर पहुंचता था। छह साल में उसे घर का पता था न ही किसी घर पर होने वाले प्रोग्राम की खबर। यह उसका चौथा प्रयास था। हर बार वह दो-चार नंबर से रह जाता था लेकिन परिवार के सहयोग ने उसे प्रोत्साहित किया और वह सफलता हासिल कर पाया।
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