पानीपत। गांव की मिट्टी में पले और बढ़े डॉ. बालकिशन शर्मा का हरियाणा गीत जय-जय-जय हरियाणा शुक्रवार को विधानसभा में गूंजा। डॉ. बालकिशन ने इसको अपने जीवन की बड़ी उपलब्धि बताया है। उन्होंने इस गीत में प्रदेश की सभ्यता और संस्कृति को आधार मानते हुए हर वर्ग को जोड़ा है। गांव की पृष्ठभूमि से निकलकर संस्कृत व हिंदी विषय में स्वर्ण पदक के साथ एमए करने वाले डाॅ. बालकिशन का साहित्य के प्रति प्रेम व लगाव बचपन से है।
डॉ. बालकिशन शर्मा ने बताया कि वे मूल रूप से करनाल के अलीपुर खालसा से हैं। अब पानीपत में अंसल सुशांत सिटी में रहते हैं। परिवार में कोई ज्यादा शिक्षित नहीं था। उनके मन में यह बात हर समय चुभती थी। उन्होंने दो विषयों में एमए करने के बाद हिंदी में पीएचडी की। उन्होंने राज्य गीत की पुरस्कार राशि एक लाख रुपये न लेने का निर्णय लिया है।
डॉ. बालकिशन ने बताया कि उनका काव्य से लगाव बचपन से थी। 1971 में सातवीं कक्षा में था। भारत-पाक युद्ध के दौरान अपने मन के भाव एक कविता के माध्यम प्रकट किए थे। वे 1988 में एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में हिंदी विभाग में प्रोफेसर बने। वे करीब 30 साल की नौकरी के बाद बतौर हिंदी विभागाध्यक्ष के पद से जून 2018 में सेवानिवृत हुए। उन्होंने इस दौरान हिंदी के साथ साहित्य में काम किया।
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गांव की छांत्र कविता के बाद और गहरा हुआ प्रेम
शहर में आने के बाद ग्रामीण अंचल की स्मृति उनके मन में रहती थी। उन्होंने एक बार कवि सम्मेलन में गांव की छांव के नाम से एक कविता के रूप में मन के भाव रखे। उनकी कविता गांव की छांव से बहुत दूर आ गया हूं, अपने गांव प्यार की उस ठंडी-ठंडी छांव से, शहर की तो आबोहवा है निराली, यहां जेबें भरी और दिल हैं खाली...कविता को लोगों ने पंसंद किया। उन्होंने फिर गांव की छांव नाम से एक पुस्तक लिख दी। उनका यह पहला हिंदी काव्य 2002 में प्रकाशित हुआ। उसके बाद लेखन निरंतर जारी रखा। इसके बाद हरियाणा संस्कृति पर आधारित हरियाणवी खंड काव्य हरा भरा हरियाणा में बारीकी से रीति-रिवाज व लोक जीवन का वर्णन किया। हरियाणा लोक साहित्य में रुचि बढ़ती चली गई। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में एमफिल के शोध निदेशक बन गए। 20 लोक कवियों पर शोध प्रबंधन लिखवाए। लेखन कार्य निरंतर चलता रहा।
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राज्य का पहला गीत लिखना सौभाग्य
डॉ. बालकिशन शर्मा ने बताया कि हरियाणा राज्य का गीत लिखने का पता चला तो उन्होंने प्रदेश के हर विषय को जोड़ते हुए इसे तैयार किया। विधानसभा में शुक्रवार को गीत गाया गया तो उनको ऐसा लगा कि जैसे जीवन में सबकुछ पा लिया हो। कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग द्वारा 2021 में राज्य गीत लिखने बारे में प्रस्ताव जारी किया गया था। उन्होंने राज्य गीत लिखा। उनको श्रेष्ठ लेखन के लिए जनकवि फौजी मेहर सिंह सम्मान के रूप में दो लाख रुपये का पुरस्कार मिल चुका है।