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दर्जनभर कालोनियां अंधेरे में डूबी

Thu, 19 Dec 2013 12:03 AM IST
अमर उजाला, पानीपत
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पानीपत। कोहरे के कारण आए फाल्ट से शहर की दर्जनभर कॉलोनियाें और आसपास के कई गांवाें में रातभर अंधेरा रहा। अंधेरे और सुबह पेयजल आपूर्ति बंद होने से जनजीवन अस्त व्यस्त रहा। सुबह पेयजल को लेकर कई कॉलोनियाें में हाहाकार रहा। वहीं कोहरे के चलते बिजलीकर्मियों के लिए लाइनों में हुए फाल्ट को ढूंढ पाना भी मुश्किल हो गया। मौसम साफ होने के बाद ही बिजलीकर्मी लाइनों के फाल्ट को ठीक कर पाए।
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बीती रात को काबड़ी रोड फीडर और 33केवी सिवाह लाइन ब्रेक डाउन हो गई। निगम से मिली जानकारी के अनुसार काबड़ी रोड फीडर रात को 12:15 बजे तथा 33केवी सिवाह लाइन भी करीब 12:30 बजे बंद हो गई थी। इसके बाद इन लाइनों से जुड़ी शहर की दर्जन भर कॉलोनियोें और ग्रामीण क्षेत्र में बिजली गायब हो गई थी। लोगों को रातभर अंधेेरे में ही रहना पड़ा।

बीती रात को काबड़ी रोड फीडर और 33 केवी सिवाह लाइन ब्रेक डाउन होने के बाद बिजली आपूर्ति करीब 13 घंटे बाद ही ही बहाल हो पाई। काबड़ी रोड फीडर का ब्रेक डाउन मंगलवार मध्यरात्रि 12:15 बजे हुआ था। यहां की सप्लाई बुधवार दोपहर दोपहर बाद करीब 1:00 बजे शुरू हो पाई। इसी तरह से 33 केवी सिवाह लाइन भी मंगलवार मध्यरात्रि करीब 12:30 बजे ब्रेक डाउन हो गई थी। इस लाइन का फाल्ट भी बुधवार दोपहर करीब 1:30 बजे ठीक हो पाया।
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33केवी सिवाह लाइन ब्रेक डाउन होने से इससे जुड़ा 11 केवी सिवाह फीडर, 11केवी दिवाना फीडर, 11 केवी नांगलखेड़ी फीडर, 11 केवी खलीला व 11 केवी संजय हास्पिटल इंडस्ट्री एरिया फीडर से जुड़े क्षेत्राें की बिजली सप्लाई प्रभावित रही। इसी तरह से 11 केवी काबड़ी रोड फीडर ब्रेक रहने से गंगाराम कालोनी, कालू पीर कालोनी व हरी नगर क्षेत्र की बिजली सप्लाई रातभर बंद रही।

कोहरे के मौसम में लाइनों में लगे इंसुलेटरों में पानी जमा हो जाता है। पानी जमा होने के कारण इंसुलेटरों में अर्थिंग हो जाती है। पानी उन लीकेज इंसुलेटरों में जमा होता है। हल्का सा भी पानी जमा होने के कारण इंसुलेटर में फाल्ट हो जाता है। फाल्ट होते ही संबंधित लाइन ब्रेक डाउन हो जाती है। इन क्षेत्रों में लाइन पेड़ों के नीचे से होकर गुजरती है, वहां पर कोहरे के कारण पेड़ों से टपकने वाली पानी की बूंदे भी इंसुलेटरों में होने वाले फाल्ट का मुख्य कारण बनती है।

बिजली कर्मचारियों के लिए कोहरे के दौरान लाइनों पर काम करना भी किसी खतरे से कम नहीं होता। बिजली के खंभों और पेड़-पौधों में अर्थिंग हो जाता है। इस तरह से खंभों और पेड़ पौधोें में करेंट होेने के कारण कुछ भी अप्रिय घटना होने का भय रहता है। ऐसे में बिजलीकर्मी भी मौसम साफ होने का ही इंतजार करते हैं।

लाइन में कहीं पर खराबी का पता दोबारा फाल्ट कराकर ही पता लगता है। इस लाइन में खराबी होती है, उस लाइन पर बिजली कर्मी बिजली के झटके देते हैं। ऐसे में बिजली का झटका लगते ही फाल्ट वाली जगह पर पटाके बजते हैं या चिंगारी छूटती है। उस जगह पर आकर फाल्ट को दूर किया जाता है।

रातभर से गायब रही बिजली सप्लाई सुबह भी नहीं चल पाई। ऐसे में इन इलाकाें में लोगों को जन स्वास्थ्य विभाग से मिलने वाली ताजा पेयजल की सप्लाई नहीं मिल पाई। ताजा पानी नहीं आने के कारण लोगों की दिनचर्या ही बिगड़ गई। लोगों को सुबह नहाने धोने व खाना बनाने में खासी परेशानी का सामना करना पड़ा।

मंगल सिंह, चांदराम, जगदीश शर्मा, बिल्लू और नरेश ने बताया कि बिजली ने होने से पानी को गरम नहीं कर पाए। ठंड के मौसम में ठंडे पानी से नहाना आसान नहीं। इसलिए वे आज स्नान ही नहीं कर पाए। इतना ही नहीं अनेक लोगाें को बिना नहाए ही रहना पड़ा। बच्चाें को भी बिना नहलाए ही स्कूल भेजना पड़ा। वहीं  अनेक परिवार पानी के लिए इधर-उधर भटकते रहे। कारण अनेक ऐसे घर भी होते हैं जहां पर पानी की टंकी तो छोटी होती। लेकिन परिवार के सदस्यों की संख्या ज्यादा होती है, ऐसे घरों में सुबह पानी नहीं आने के कारण ज्यादा परेशानी रही। शहरों में एक ही घर मेें कई-कई किरायेदार भी रहते हैं। ऐसे में अगर एक पहर में भी पानी या बिजली सप्लाई बंद रहने के कारण इनकी परेशानी बढ़ जाती है।

कोहरे में एकाध जगह पर लाइनों व फीडरों में ब्रेड डाउन हो जाती है। रात को जहां पर भी ब्रेक डाउन हुई थी, उस समय कोहरे के कारण उसे ठीक करना संभव नहीं होता। मौसम साफ होने के बाद ही लाइनों के फाल्ट आसानी से ठीक होे पाते हैं।
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एमएस दहिया, एसई, बिजली निगम, पानीपत सर्कल

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