पानीपत। विकास नगर निवासी पालेराम की पत्नी रामप्यारी इन्सां (75) का शरीर और आंखें दान की हैं। शामली के अजय संगल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एंड रिसर्ज सेंटर में शरीद दान किया गया। जबकि आंखें अन्य जगह दान की हैं। रामप्यारी इन्सां पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थी। बुधवार को अपने घर पर ही अंतिम सांस ली। परिवार ने वीरवार को अपने गुरु डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह की शिक्षाओं पर चलते हुए शरीर दान किया। आवास पर अरदास का शबद बोलकर फूलों से सजी एंबुलेंस में शरीर को रखा गया और कॉलोनी की गलियों से मुख्य मार्ग तक उनकी अंतिम विदाई यात्रा निकाली।
जहां से भी एंबुलेंस निकली लोगों ने पुष्प वर्षा कर रामप्यारी इन्सां को नमन किया। माता रामप्यारी की पुत्रवधू सोनिया ने बेटा बेटी एक सम्मान के नारे को सार्थक करते हुए अपनी सास को श्रद्धांजलि देते हुए उनकी अंतिम यात्रा में अर्थी को कंधा दिया। सोनिया ने कहा कि शादी के बाद बेटियों के दो घर होते हैं। जन सेवा दल के सदस्य चमनलाल गुलाटी ने कहा कि जीते जी रक्तदान मरने के बाद आंखें दान ओर शरीर दान आज के युग में सबसे बड़ा दान है। आंखें दान करने से दो अंधेरी जिंदगी को रोशनी मिलती है और शरीर दान करने से समाज को अच्छे डॉक्टर मिलते हैं। संवाद