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सीढ़ियों से गिरी बच्ची को कोरोना संक्रमित बता देखने से किया इंकार, सीएमओ की सख्ती के बाद मिला उपचार

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पानीपत। शव गृह के बाहर रोती हुई सृष्टी मां हाथ जोड़कर अपनी बेटी को अस्पताल में भर्ती होने के लिए क? - फोटो : Panipat
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धमीजा कॉलोनी में खेलते वक्त सीढ़ियों से गिरी 10 साल की मासूम को कोरोना संक्रमित बताकर सिविल अस्पताल में डॉक्टरों ने इलाज करने से इंकार कर दिया। यहां से डॉक्टरों ने बच्ची को रोहतक पीजीआई रेफर कर दिया। परिजनों ने पीजीआई में कॉल कर बेड की उपलब्धता के बारे में पूछा तो उन्हें बताया गया कि पीजीआई में बेड उपलब्ध नहीं हैं।
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ऐसे में सिविल अस्पताल में बच्ची की मां 15 मिनट तक डॉक्टरों के सामने गिड़गिड़ाती रही, उनसे बच्ची के उपचार के लिए विनती करती रही। इस दौरान बच्ची की हालत बहुत अधिक गंभीर बनती जा रही थी। उसको सांस लेने में भी दिक्कत थी और ऑक्सीजन की सख्त जरूरत थी। अस्पताल में मौजूद कुछ लोगों ने बच्ची की हालत देखकर सिविल सर्जन को इसकी जानकारी दी। इस पर तुरंत संज्ञान लेते हुए सिविल सर्जन ने सख्ती दिखाई औ डॉक्टरों को तुरंत बच्ची का इलाज शुरू करने के निर्देश दिए।
लखनऊ की रहने वाली गीता ने बताया कि वह कुछ दिन पहले अपने मायके धमीजा कॉलोनी आई थी। वीरवार को खेलते वक्त उसकी बेटी 10 साल की सृष्टि सीढ़ियों से गिर गई। खेलते वक्त उसका पैर फिसल गया। उसकी छाती और सिर में गुम चोट आई। उन्होंने निजी अस्पताल में उसका इलाज कराया, लेकिन स्वास्थ्य में सुधार नहीं हो रहा था। वहां डॉक्टरों ने उन्हें जवाब दे दिया। वह बच्ची को लेकर सिविल पहुंची। चोट के कारण बच्ची को सांस लेने में दिक्कत आ रही थी। डॉक्टरों ने यहां बिना जांच किए ही उसे कोरोना पॉजिटिव बता दिया और रोहतक पीजीआई रेफर कर दिया। जबकि बच्ची की हालत बहुत गंभीर थी और सांसे उखड़ रहीं थीं। सिविल सर्जन से संपर्क करने के बाद बच्ची को दाखिल किया गया है। अब भी बच्ची की हालत गंभीर है।
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बेड नहीं मिला तो कुर्सी पर बैठाकर दी गई ऑक्सीजन
सिविल अस्पताल में कोरोना संक्रमण के कारण बेडों की कमी चल रही है। सभी बेड पर मरीज हैं। ऐसे में जब बच्ची को इमरजेंसी वार्ड लेकर गए तो वहां पर बेड नहीं मिला। बच्ची को कुर्सी पर बैठाकर ऑक्सीजन दी गई।
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बच्ची का इलाज चल रहा है, डॉक्टरों को चेतावनी दी गई है: डॉ. संजीव
जैसे ही उनके संज्ञान में मामला आया, तुरंत बच्ची को दाखिल करने के निर्देश दे दिए थे। डॉक्टरों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वह इलाज में लापरवाही न बरतें। अगर भविष्य में इस प्रकार की शिकायतें मिलीं तो कार्रवाई की जाएगी।
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- डॉ. संजीव ग्रोवर, सिविल सर्जन, पानीपत।
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