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Panipat News: कृष्ण की बाल लीला सुनकर आनंदित हुए श्रद्धालु

Sat, 30 May 2026 01:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
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कांशीगिरि मंदिर में कथा सुनते श्रद्धालु। स्रोत : सभा
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पानीपत। कांशीगिरी मंदिर में साप्ताहिक श्रीमद्भागवत कथा का शुक्रवार को पांचवां दिन रहा। कथावाचक आचार्य लालमणि पांडेय ने भगवान कृष्ण की दामोदर लीला का वर्णन किया जिससे यशोदा मैया धन्य हो जाती है। भगवान कृष्ण की बाल लीला का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु आनंदित हुए।
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आचार्य ने कथा में बताया कि पूतना स्तनों में जहर लगाकर प्रभु को मारने आई थी। फिर भी प्रभु ने उसे मारकर परम पद अपना लोक बैकुंठ धाम दे दिया। भगवान के समान और कौन दयालु होगा। संकाटसुर का उद्गार करके बताया कि भोगों को भगवान से ऊपर न समझें। भगवान ने वृजावर्त का उद्गार करके मां को विश्वरूप का दर्शन कराया। भगवान का नामकरण हुआ। बड़े भैया का बलराम और भगवान का कृष्ण। प्रभु बाल लीला करते हैं। गोपियों के घर जाकर माखन खाते हैं, निर्मल मन ही मक्खन है, इन गोपियों को मालूम है कि कृष्ण साक्षात भगवान हैं। भगवान मिट्टी खाते हैं मतलब है ब्रज रस को अपने ह्रदय में रखते हैं। मां के द्वारा रस्सी में बंधकर वृक्ष बने हुए कुबेर के दो पुत्र नलकूबर-मणिग्रीव का उद्धार करते हैं। वो प्रार्थना करते हुए कहते हैं कि वाणी प्रभु का नाम लें। कान कथा श्रवण करें, नेत्र आपका दर्शन करें, सिर आपके चरणों में झुका रहे और आपके ही शरीर रूप संतों का दर्शन सानिध्य हमें प्राप्त होता रहे। एक दिन जब माता यशोदा कृष्ण को दूध पिला रही थीं, तभी चूल्हे पर रखा दूध उबलने लगा। यशोदा मैया कृष्ण को छोड़कर दूध उतारने चली गईं। इससे नाराज होकर बालकृष्ण ने मथानी का बर्तन फोड़ दिया और मक्खन चुराकर खाने लगे। जब मैया यशोदा वापिस आईं और उनकी शरारत देखकर उन्होंने कृष्ण को सजा देने के लिए एक भारी लकड़ी के उखल से बांधने का निश्चय किया। भगवान कृष्ण की बाल लीला प्रसंग सुनकर श्रद्धालु आनंदित हुए। कथा के बाद महिला भजन मंडली ने भजन-कीर्तन किया और भगवान कृष्ण के भजनों का गुणगान किया। समापन पर सबको प्रसाद वितरित किया गया।
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कांशीगिरि मंदिर में कथा सुनते श्रद्धालु। स्रोत : सभा

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