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कोरोनाकाल में महाकाल के भक्त हैं निराश, इस सावन फिर टूटी कांवड़ यात्रा की डोर

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सावन मास के प्रमुख त्योहार महाशिवरात्रि पर जलाभिषेक के लिए शिवभक्तों की कांवड़ यात्रा कर गंगाजल लाने की आस्था रही है, लेकिन कोरोना महामारी को देखते हुए सरकार ने इस बार भी कांवड़ यात्रा पर रोक लगा दी है। जिससे शिव भक्तों में मायूसी छा गई है। शिवभक्त इस बार कांवड़ नहीं ला सकेंगे। इतिहास में दूसरी बार किसी बीमारी के चलते कांवड़ यात्रा को सरकार ने निरस्त किया है। शिव भक्तों व लंगर कमेटियों ने सरकार से अपील की है कि वह यात्रा को रद्द न करते हुए इसे कम अवधि के लिए खोले।
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भोले बाबा की भक्ति का सबसे उत्तम सावन मास प्रारंभ होते ही कोने कोने में बोल बम सुनाई देने लगता था। हर साल कांवड़ यात्रा में दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों के लाखों शिव भक्त गंगा जल लाने के लिए हरिद्वार जाते थे। लेकिन, कोरोना का ऐसा संकट कि शिव भक्तों के उत्साह और आस्था की डोर टूटी है। हालांकि बीमारी से लड़ने के लिए कुछ शिव भक्तों ने सरकार के इस फैसले को खूब सराहा है।
गत वर्ष भी रद्द की थी कांवड़ यात्रा
पिछले साल 15 मार्च को प्रदेश में कोरोना संक्रमण का पहला मामला मिला था। संक्रमण के खतरे को देखते हुए सरकार ने कांवड़ यात्रा को स्थगित करने का निर्णय लिया था। साथ ही सरकार ने यह भी फैसला लिया था कि शिवभक्तों को गंगा जल उन्हीं के राज्यों में उपलब्ध कराया जाएगा।
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कांवड़ यात्रा में कुंभ की तरह उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़
कांवड़ यात्रा में दूसरे राज्यों से लाखों की संख्या में कांवड़िए हर की पैड़ी जाते हैं। जहां से गंगाजल लेकर शिवरात्रि पर अपने-अपने क्षेत्रों के शिवालयों में जलाभिषेक करते हैं। कांवड़ यात्रा के दौरान कुंभ की तरह हरिद्वार, ऋषिकेश में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ता है।
क्या बोले शिवभक्त
कांवड़ यात्रा निरस्त होने से निराशा हाथ लगी। हालांकि बीमारी से लड़ने के लिए एहतियात बरतनी आवश्यक है, लेकिन कांवड़ यात्रा के लिए जरूरी गाइडलाइन जारी की जा सकती थी।
प्रवीण कुमार, गांव लोहारी।
लगातार दूसरी बार कांवड़ यात्रा को रोका गया है। बीमारी से लड़ने के लिए सरकार का यह फैसला सराहनीय है। शिवभक्त घर में रहकर की भगवान शिव की आराधना करें।
- अनिल कुमार, गांव घरौंडा।
प्रत्येक वर्ष भगवान शिव की कांवड़ लेने जाता हूं। इस बार भी काफी उत्साह था। लेकिन सरकार ने कांवड़ यात्रा को लेकर जो निर्णय लिया है वह देशहित में है।
- विनोद मलिक, गांव ऐंचरा।
मेरी मनोकामना पूर्ण होने पर अबकी बार मैंने हरिद्वार से कांवड़ लाकर शिवरात्रि पर जलाभिषेक करने का विचार किया था, किंतु कोरोना वायरस के चलते कांवड़ यात्रा की सभी तैयारियां धरी रह गई है।
- अमित कुमार, गांव भालसी।
मनोकामना पूर्ति के लिए मैंने पहली बार कांवड़ लाने का संकल्प लिया था किंतु कांवड़ यात्रा रोककर सरकार ने लोगों को निराशा दी है। हालांकि अधिकतर धार्मिक स्थलों से पाबंदियां हटाई जा चुकी है।
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- नीरज कुमार, गांव भालसी।
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