बाहरी कॉलोनियों में आरडब्ल्यूए बनाकर एक हजार रुपये प्रति वर्ग गज के रेट की शर्त हट गई है। अब यह रेट दो सौ रुपये से भी कुछ कम हो गया है। वहीं शहर की करीब 79 कॉलोनियों को वैध करने की दिशा में भी काम चल पड़ा है। शहरी स्थानीय निकाय विभाग के निदेशालय द्वारा कॉलोनियों को वैध करने की फाइल पर लगाई आपत्तियों को भी दूर कर दिया है और नगर निगम से फाइल निदेशालय भेज दी गई है। अब निदेशालय स्तर पर कॉलोनियों को वैध करने और इनको मूलभूत सुविधा देने की दिशा में तेजी से काम होगा। निगम अधिकारियों ने कॉलोनियों के जल्द ही वैध होने की उम्मीद जताई है।
शहर की बाहरी कॉलोनियों में विकास कार्य रुक जाने के चलते स्थानीय लोगों व वार्डों ने नगर निगम में हंगामा तेज कर दिया है। दो दिन पहले वार्ड-23 पार्षद शीला ने स्थानीय लोगों के साथ मिलकर नगर निगम कार्यालय पर ताला तक जड़ दिया था। इन सबके चलते शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने बाहरी कॉलोनियों में विकास को लेकर तय एक हजार रुपये प्रति वर्गगज के रेट को भी वापस ले लिया है। नगर निगम अधिकारियों की माने तो यह अब घटाकर दो सौ रुपये प्रति वर्ग गज से भी कम कर दिया है। हम बता दें कि निगम के हाउस की बैठक में पार्षदों ने एक हजार रुपये वर्ग गज के रेट को ज्यादा बताया था और दो सौ रुपये से भी कम करने की मांग की थी।
79 कॉलोनियों पर लगाई आपत्ति भी दूर की
शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने पिछले दिनों नगर निगम से सर्वे कराकर बाहरी कॉलोनियों को वैध करने की फाइल तैयार करवाई थी। नगर निगम ने शहर की 79 कॉलोनियों को वैध करने की सिफारिश की थी और इसका सर्वे भी कराया गया था। स्थानीय अधिकारियों ने फाइल निदेशालय भेज दी थी, लेकिन निदेशालय स्तर के अधिकारियों ने कॉलोनियों को वैध करने की सिफारिश को शर्तानुसार नहीं पाया। ऐसे में निदेशालय ने फाइल पर आपत्ति लगा दी थी। स्थानीय अधिकारियों द्वारा इन आपत्तियों को अब दूर कर दिया है।
बाहरी कॉलोनियों मूलभूत सुविधा तक को तरस रहे लोग
प्रदेश सरकार द्वारा पिछले दिनों विस सत्र में बाहरी कॉलोनियों में मूलभूत सुविधा मुहैया कराने के फैसले पर मुहर लगाई थी। पानीपत ग्रामीण विधायक महिपाल ढांडा ने खुद इस मामले को उठाया था। जिसका सभी दलों ने समर्थन दिया था। बाहरी कॉलोनियों में आज रहने लायक जीवन नहीं है। लोग बिजली, पानी तक को तरस रहे हैं। गली व नाली मिलना तो दूर का विषय है।
वार्ड-24 में ही बन पाई आरडब्ल्यूए
शहरी स्थानीय निकास विभाग द्वारा बाहरी कॉलोनियों में आरडब्ल्यूए बनाने की जिम्मेदारी संबंधित पार्षद को दी गई थी। वार्ड-24 पार्षद दुष्यंत भट्ट ने अपने वार्ड में चार आरडब्ल्यूए बनाई थी। इन कॉलोनियों में विकास भी कराया गया, लेकिन बाकी कॉलोनियों में आरडब्ल्यूए नहीं बन सकी। जिसके चलते बाहरी कॉलोनियों में विकास का पहिया थम गया था। कुछ जानकारों का कहना है कि कॉलोनियों में आरडब्ल्यूए तो बनाना आसान था, लेकिन एक हजार रुपये प्रति वर्गगज के हिसाब से विकास शुल्क जमा कराने को कोई भी आगे नहीं आ रहा था। यह पैसा आरडब्ल्यूए व नगर निगम के ज्वाइंट बैंक खाते में जमा होना था और यहीं से पैसा कॉलोनी के विकास कार्यों पर खर्च होना था।
नगर निगम की बाहरी कॉलोनियों में विकास को लेकर तय एक हजार रुपये प्रति वर्ग गज रेट कुछ कम हुआ है। यह लगभग दो सौ रुपये से भी कम हो गया है। निदेशालय द्वारा बाहरी कॉलोनियों को वैध करने ककी फाइल पर लगाई गई आपत्तियों को दूर कर दिया गया है। अब निदेशालय स्तर पर कॉलोनियों को वैध करने की प्रक्रिया पर तेजी के साथ काम चल रहा है।
एनडी वशिष्ठ, एसई, नगर निगम पानीपत।