पानीपत। नगर निगम सोनीपत के बाद पानीपत में भी इन्हांस किए टेंडरों में घोटाले की बू आने लगी है। विजिलेंस और सीएम फ्लाइंग की टीम ने शुक्रवार को भ्रष्टाचार की परतों को खोलने निगम कार्यालय पहुंची। टीमों के आने की सूचना मिलते ही ज्यादातर अधिकारी निगम कार्यालय छोड़ गए। टीम ने कई घंटे तक कर्मचारियों से पूछताछ की।
बताया जा रहा है कि जांच टीम सोनीपत नगर निगम भवन बनाने के मामले में 58 करोड़ से 88 करोड़ तक इन्हांस की गई राशि के टेंडर की जांच करने पानीपत पहुंचे थे। फिलहाल पानीपत में तैनात एक जेई ने सोनीपत में ये बिल बनाए थे। इसलिए जांच टीम पानीपत पहुंची। इसके अलावा निगम में रोजाना मिल रही भ्रष्टाचार की सूचनाओं पर भी टीमों ने जांच पड़ताल की। इस बारे में निगम के सभी अधिकारी मौन धारण कर चुके हैं। बताया जा रहा है कि वरिष्ठ अधिकारी ने सभी निगम अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसी भी मामले में कोई कुछ नहीं बोलेगा। निगम अधिकारियों से बार बार प्रयास के बाद भी संपर्क साधना मुश्किल हो रहा है। कुछ अधिकारी तो फोन तक बंद कर चुके हैं।
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हाली पार्क भी जांच के घेरे में
हाली पार्क का निर्माण भी जांच के घेरे में आ चुका है। इस पार्क पर अब तक करीब 23 करोड़ रुपये खर्च हो चुुुके हैं। इसके बाद भी आज तक हाली पार्क शुरू नहीं हो सका। इसके अलावा भी निगम अधिकारियों ने अलग से पैसा खर्च कर हाली पार्क की सूखी झील को भरने के लिए बजट खर्च किया फिर भी झील नहीं भरी। बताया जा रहा है कि पहले भी पार्क निर्माण की जांच हुई थी अब फिर से एक नई जांच खुल गई है।
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शहरी विधानसभा क्षेत्र के विकास कार्यों की भी जांच
शहरी विधानसभा क्षेत्र के विकास कार्यों की भी जांच अधूरी है। बताया जा रहा है कि इस मामले में भी गुप्तचर विभाग और विजिलेंस सक्रिय है। शहरी विस में निगम अधिकारियों ने लापरवाही से लाखों के काम को इन्हांस कर करोड़ों तक पहुंचाया है। माना जा रहा है कि विजिलेंस रिपोर्ट पर निगम अधिकारियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हो सकती है।
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ग्रामीण विस की जांच अलग
मौजूदा हालात देखते हुए ग्रामीण विधानसभा के अंतर्गत किए गए विकास कार्य भी जांच के घेरे में आ चुके हैं। खुद पार्षद निगम अधिकारियों को भ्रष्टाचार के सबूत देकर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। ताजा मामले वार्ड 13 और 16 का भी है।
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निगम के भ्रष्टाचार पर सरकार सख्त, होगी कार्रवाई
निगम में फैले भ्रष्टाचार के मामलों पर सीनियर डिप्टी मेयर ने कहा कि सरकार जीरो टॉलरेंस पर काम रही है। अब सरकार का रवैया भ्रष्टाचार को लेकर और भी सख्त हो चुका है। निगम के सभी गोलमालों की रिपोर्ट संगठन ने मांग ली है। 15 दिन के भीतर सभी के जवाब देने होंगे। इसके बाद भ्रष्ट अधिकारी नपेंगे।