पानीपत। दीपावली पर बाजारों में रौनक लौट आई है। हर तरफ रंग-बिरंगी लाइटें, सजावटी सामान और खुशियों की चमक नजर आ रही है लेकिन लोग अब चाइनीज सामानों की जगह स्वदेशी उत्पादों को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं। दुकानों पर इस बार मिट्टी के दीयों, हैंडमेड फूल-मालाओं, कागज की लाइटों और स्थानीय कलाकारों की ओर से बनाए गए सजावटी सामान की मांग है। एक ओर जहां वोकल फॉर लोकल अभियान ने लोगों को आत्मनिर्भर बनने का संदेश दिया वहीं दूसरी ओर लोगों में अपने देश के उत्पादों के प्रति गर्व की भावना बढ़ी है। अब ग्राहक दुकानों पर पूछते भी हैं कि क्या यह सामान स्वदेशी है या विदेशी यही कारण है कि बाजार में स्वदेशी उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। बाजारों में हाथ से बनी फूल-मालाएं, हैंडमेड दीये, मिट्टी की मूर्तियां, जूट से बने हैंगिंग्स लोगों को खूब भा रहे हैं।
सेक्टर-12 निवासी रीना शर्मा ने बताया कि हमारे घर में हर साल चाइनीज लाइट लगती थी लेकिन पिछले दो साल से अब हम स्वदेशी सामान लेना पसंद करते हैं। इससे न केवल हमारे देश के कारीगरों को फायदा होता है बल्कि त्योहार की सच्ची खुशी भी मिलती है। दिवाली केवल रोशनी और सजावट का पर्व नहीं, बल्कि देशभक्ति और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन गई है। स्वदेशी उत्पादों की यह रौनक न केवल बाजारों में चमक बिखेर रही है, बल्कि देश के कारीगरों और छोटे व्यवसायियों के चेहरे पर भी मुस्कान ला रही है।
फूल-मालाओं के दुकानदार साहिल ने बताया कि कोरोना के बाद ग्राहकों की सोच में बड़ा बदलाव आया है। पहले जहां चाइनीज लाइटें और सजावट के सामान हाथों-हाथ बिक जाते थे वहीं अब लोग देसी उत्पादों की ओर रुख कर रहे हैं। चाइनीज उत्पाद ज्यादा टिकाऊ भी नहीं होते। अब लोग चाइनीज लाइटों की बजाए फूल-मालाओं से सजाना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। अगर ग्राहकों को घर को सजाने के लिए लाइट लेनी है तो पहले जांच करते हैं चाइनीज है या स्वदेशी।