यातायात के नियमों के प्रति सावचेत करने के लिए पुलिस और प्रशासन की ओर से चलाया गया सड़क सुरक्षा सप्ताह शुभारंभ कार्यक्रम डीसी और एसपी के नहीं पहुंचने से औपचारिकता तक ही सिमट गया।
कार्यक्रम में पहुंचे डीएसपी ट्रैफिक भी साल 2015 में हुए सड़क हादसों के आकड़ें तक नहीं रख सके। कार्यक्रम में बुलाए गए बच्चे भी इसे बीच में ही छोड़कर चले गए।
जिले में शुक्रवार से सड़क सुरक्षा सप्ताह शुरू हुए। इसके लिए बाल भवन में एक कार्यक्रम रखा गया। यहां डीसी समीर पाल सरो, एसपी राहुल शर्मा, आरटीओ सचिव सहित कई अधिकारियों को शामिल होना था।
कार्यक्रम शुरू होने के डेढ़ घंटे बाद तक डीसी और एसपी वहां नहीं पहुंचे। ऐसे में वहां मौजूद लोगों की परेशानी बढ़ गई। कार्यक्रम की प्रस्तुति देने आए बच्चे भी मायूस हो गए।
डीसी और एसपी ने ऐनवक्त पर कार्यक्रम में जाने का फैसला टाल दिया। इसके बाद डीएसपी ट्रैफिक आत्माराम कार्यक्रम में पहुंचे। यहां उन्हाेंने मंच से अपनी बात शुरू ही की थी कि पार्क में खेलने आए बच्चे उठकर जाने लगे। पुलिसकर्मी बच्चों को रोकते दिखे। आखिरकार अधिकारियों को कार्यक्रम को समाप्त करना पड़ा।
फ्रूटी और लड्डू देने के नाम पर बुलाया
कार्यक्रम में बच्चों ने बताया कि वे यहां से जा रहे थे। कुछ पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोका तथा कुछ देर कार्यक्रम में बैठने पर फ्रूटी और लड्डू देने की बात कही।
वे उनकी बात सुनकर आ गए। कुछ बच्चे हाथ में क्रिकेट का बल्ला लेकर भी पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि वे तो समीप ही पार्क में क्रिकेट खेल रहे थे। पुलिसकर्मी उनको पार्क से बुला लाए। उन्हें सड़क सुरक्षा सप्ताह की कोई जानकारी नहीं है।
निष्क्रिय हो रहा आरएसओ
रोड सेफ्टी आर्गेनाइजेशन (आरएसओ) के प्रधान सुधीर छाबड़ा ने कहा कि एसपी की उपस्थिति में आरएसओ की माह में एक बैठक होनी चाहिए।
लेकिन एसपी ने आज तक उनकी कोई बैठक नहीं ली। ऐसे में आरएसओ निष्क्रिय होता जा रहा है। जिले में पहले 200 आरएसओ थे।
जो अब घटकर 140 रह गए हैं। ऐसा ही चला तो ये भी नहीं रहने वाले। आरएसओ ने अपने स्तर पर कार्यक्रम रखा। इसके लिए डीसी और एसपी को न्योता भी दिया। दोनों अधिकारियों ने आने का समय भी दिया, लेकिन ऐवक्ता पर दोनों ही नहीं आए।
सवालाें को टालते रहे डीएसपी
कार्यक्रम में आए डीएसपी ट्रैफिक आत्माराम अपनी बातों को 2016 को जीरो एक्सीडेंट बनाने तक ही घुमाते रहे। मीडिया के साल 2015 में हुए सड़क हादसों एवं नुकसान के बारे में पूछे गए सवाल पर वह सवालों को टालते रहे। सड़क सुरक्षा सप्ताह की कार्ययोजना को लेकर पूछे गए सवालों को टालते दिखे।
गत वर्ष हुए 560 सड़क हादसे
जिले में 2015 में 560 सड़क हादसे हुए। इनमें 241 लोगों की मौत हुई और 524 लोग घायल हो गए। यह आकड़ा 2014 में सड़क हादसों और जानमाल के नुकसान के बराबर ही है।
ऐसे में पुलिस व प्रशासन के हादसों को रोकने के सब दावे फेल हो रहे हैं। पुलिस के आकड़ों के अनुसार 2014 में 582 सड़क हादसे हुए। इनमें 263 सड़क हादसों में 256 लोगों की मोत हुई और 319 सड़क हादसों में 479 लोग घायल हुए।
छत के नीचे सिमटा कार्यक्रम
सड़क सुरक्षा सप्ताह पर हर साल मैराथन दौड़ या फिर सार्वजनिक रूप से कार्यक्रम होता था। इस तरह के कार्यक्रमों में पूरे जिले में संदेश जाता था, लेकिन इस बार सड़क सुरक्षा सप्ताह कार्यक्रम एक छत के नीचे समेट दिया।
नए साल के सेलिब्रेशन मेें व्यस्त रहे अधिकारी
डीसी व एसपी सड़क सुरक्षा सप्ताह के कार्यक्रम को छोड़ शुक्रवार को नए साल की पार्टी सेलिब्रेशन में लग गए। दोपहर बाद स्काईलार्क में शुरू लंच पार्टी शाम तक चली। इसी दौरान प्रशासन व विभागों के अधिकारी भी शामिल हुए।
समीर पाल सरो, डीसी पानीपत।