पानीपत में लघु सचिवालय में डीसी और एसपी का दरबार नहीं लग सका। लोगों में उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों के सीएम के आदेशों की धज्जियां उड़ाने पर रोष दिखा और उनको मायूस होकर लौटना पड़ा।
फेस्टिवल सीजन के बाद सोमवार को लघु सचिवालय में सामान्य दिनों की अपेक्षा ज्यादा लोग अधिकारियों के पास फरियाद लेकर पहुंचे। सबसे अधिक लोग डीसी और एसपी के पास पहुंचे। यहां पर दोनों में से कोई भी अधिकारी नहीं मिला।
डीसी के नहीं होने पर एसडीएम अश्वनी मलिक ने लोगों की समस्याएं सुन रहे थे, लेकिन वे भी कुछ देर समस्या सुनकर उठकर चले गए। उनके पीछे-पीछे फरियादी लगे रहे। लेकिन किसी की सुनवाई नहीं हो सकी। लोग यहां से मायूस होकर लौटे।
यहीं हाल एसपी कार्यालय का रहा। यहां पर भी फरियादी पुलिस अधिकारियों के चक्कर लगाते रहे। लेकिन कोई भी अधिकारी नहीं मिला। एडीसी आफिस के बाहर लोग भी अपनी समस्याओं के समाधान को लेकर काफी देर तक बैठे रहे। यहां पर सुनवाई न होने पर वे लौट गए।
ये रहा कार्यालयों का हाल
मुख्यमंत्री ने लोगों की दिक्कतों को देखते हुए हर रोज 11 से 12 बजे तक डीसी और एसपी समेत सभी विभागीय अधिकारियों को समस्या सुनने के आदेश जारी कर रखे हैं। उन्होंने 10 नवंबर को गोहाना रैली में भी लोगों की समस्याओं के समाधान पर विशेष ध्यान देने का दावा किया। लेकिन 24 घंटे से पहले ही अधिकारियों ने उनके दावों को पंख लग गए।
अमर उजाला टीम सुबह डीसी, एसपी और एडीसी कार्यालय पहुंची। उनको यहां पर फरियादियों की भीड़ तो नजर आई। लेकिन कोई अधिकारी नहीं मिला। डीसी के न होने पर एसडीएम अश्वनी मलिक समस्या सुन रहे थे। वे भी कुछ देर बाद उठकर चले गए। एसपी कार्यालय में कर्मचारी एसपी के आने का इंतजार कर रहे थे। उनसे ज्यादा उत्सुकता फरियादियों को थी। लेकिन 12 बजे तक एसपी कार्यालय में नहीं पहुंची। इसके बाद फरियादी एक-एक कर लौट गए।
सामने आने से बचते रहे फरियादी
डीसी और एसपी कार्यालय पर फरियादी मीडिया के सामने आने तक को टलने लगे। एक महिला डिपोधारक की राशन न देने की शिकायत करने डीसी के दरबार में पहुंची थी। वह 12 बजे तक वहां बैठकर इंतजार करती रही। डीसी के नहीं मिलने पर वह मायूस होकर लौटनी पड़ी।
मीडियाकर्मियों ने उनका नाम और समस्या जानने का प्रयास किया तो उसने कहा कि वह सामने आएगी तो उसको राशन तक नहीं मिलेगा। यहीं हाल एडीसी और एसपी कार्यालय में पहुंचे अधिकारियों का रहा।