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रुक-रुककर हो रही बारिश से मंडियों में भीग रहा धान खराब होने का खतरा

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पानीपत। आढ़तियों की हड़ताल और चार दिन से रुक-रुककर हो रही बारिश के चलते अनाज मंडियों में पड़ा धान भीगकर खराब होने का खतरा गहराता जा रहा है। सरकार ने किसानों की मांगों को मानते हुए खरीद चालू करने का आश्वासन दिया है, लेकिन किसानों का जो धान मंडियों में भीग चुुका है, उसे सुखाने में किसानों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी। वहीं, मौसम साफ होने तक किसान धान सुखाने में बेबस नजर आ रहेे हैं। जिले की अनाज मंडियों में करीब 20 हजार क्विंटल धान खराब होने के कगार पर है। वहीं, खेतों में खड़ी धान की फसल के भी खराब होने का अंदेशा है। हालांकि शनिवार को दिन में इसराना खंड को छोड़कर शेष जिला बारिश से अछूता रहा। दिन भर काली घटाएं मंडराती रहीं, लेकिन शाम को तेज बारिश ने किसानों के सपनों को धो दिया। मौसम विभाग द्वारा भी आगामी दो दिनों तक बारिश या बूंदाबांदी की आशंका जताई जा रही है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार रुक-रुककर हो रही बारिश से हालांकि अभी नुकसान का आकलन नहीं किया जा सकता। फसल की वास्तविक स्थिति का पता मौसम के साफ होने के बाद और धान में पनपने रोग की स्थिति के बाद लगेगा। बारिश के कारण जो फसल गिर चुकी है, उसमें उत्पादन में कमी आना स्वाभाविक है। किसानों का कहना है कि बारिश के कारण किसानों को 20 से 30 प्रतिशत या इससे भी अधिक का नुकसान झेलना पड़ सकता है।
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इन दिनों बेमौसमी बारिश जिसे आसूज की झड़ी भी कहा जा रहा है, बीते 12 सितंबर से जारी है। लगभग हर रोज जिले के अलग-अलग हिस्सों में बारिश असर दिखा रही है। वहीं, मौसम विभाग की ओर से अभी आगामी तीन-चार दिनों तक बारिश होने के प्रबल आसार बने हुए हैं।
खंड 24 सितंबर 23 सितंबर 22 सितंबर 21 सितंबर
पानीपत -- 50 एमएम 11 एमएम 19 एमएम
समालखा -- 50 एमएम 12 एमएम 32 एमएम
इसराना 07 एमएम 40 एमएम 15 एमएम 45 एमएम
बापौली -- 38 एमएम 12 एमएम 37 एमएम
मतलौडा -- 38 एमएम 20 एमएम 16 एमएम
किसान मौसम की मार से परेशान हैं। बीते चार दिनों से रुक-रुक कर बारिश हो रही है। शनिवार को पानीपत जिले में दिनभर बूंदाबांदी को छोड़कर बारिश नहीं हुई, लेकिन शाम को तेज हो गई। बारिश से नुकसान का सही पता लगभग एक सप्ताह बाद चल पाएगा।
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- डॉ. राजबीर सिंह, कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र पानीपत।
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