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बेटे-बेटियों, पोते पोतियों के बाद भी 23 साल से अकेली दर दर की ठोकरें खाने को मजबूर 68 वर्षीय केला देवी

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जितेंद्र नरवाल
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पानीपत। विश्व भर में 23 जून को अंतरराष्ट्रीय विधवा दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य विधवाओं की स्थिति में सुधार करना है, ताकि वे अपने मूलभूत अधिकारों से वंचित न रहें। सरकार ने विधवाओं की सहायता के लिए कई योजनाएं बनाई हैं, लेकिन इन तक यह पहुंच नहीं पाती हैं। जागरूकता के कारण विधवा महिलाओं को सरकार द्वारा चलाई गई कई योजनाओं के बारे में पता नहीं होता। दूसरी ओर, कुछ लाभार्थी महिलाएं पेंशन के लिए दस्तावेज गलत जमा कर देती हैं। जिस कारण उन्हें सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते हैं और उन्हें योजनाओं लाभ नहीं मिल पाता। वहीं समाज कल्याण विभाग का कहना है कि किस विधवा महिला को योजना की जरूरत है, यह उन्हें पता नहीं चल पाता। क्योंकि जिले में कई विधवाएं सशक्त परिवार से भी हैं, जो योजना के लिए आवेदन नहीं करती।
पानीपत जिले में समाज कल्याण विभाग इस समय 36151 महिलाओं को विधवा पेंशन दे रहा है। पहले ये पेंशन 2250 रुपये प्रति माह थी, जो अब 2500 रुपये कर दी गई है। इसके अलावा विधवा पर आश्रित दो बच्चों के खर्च के तौर पर 1600 रुपये प्रति बच्चे के हिसाब से खर्च मिलता है। जिले में विधवाओं पर आश्रित 8108 बच्चें हैं, अगर दो से अधिक बच्चे हैं तो भी खर्च सिर्फ दो बच्चों का ही मिलता है।
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एनएफबी से मिलते हैं एकमुश्त 20 हजार रुपये
जिला समाज कल्याण अधिकारी अनीता ने बताया कि राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना (एनएफबी) के तहत विधवा को एकमुश्त 20 हजार रुपये की सहायता राशि दी जाती है। इस योजना में एक शर्त ये है कि मरने वाले की उम्र 60 वर्ष से कम होनी चाहिए। सरकार की ओर से जारी की गई इस योजना के तहत बीपीएल श्रेणी में महिला को पति की मौत के एक साल के अंदर इस योजना के लिए आवेदन करना होता है।
बेटी की शादी पर 51 हजार रुपये का मिलता है शगुन
प्रदेश सरकार की ओर से संचालित वेलफेयर स्कीम के तहत मुख्यमंत्री विवाह शगुन योजना के अंतर्गत विधवा महिलाओं को उनकी बेटी की शादी पर 51 हजार रुपये का कन्यादान मिलता है। इसके लिए कुछ जरूरी दस्तावेज जिला कल्याण कार्यालय में जमा करवाने होते हैं, जिसके बाद प्रार्थी का इसका लाभ दिया जाता है।
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भरा पूरा परिवार, पति के गुजरने के बाद 23 साल से अकेली रह रहीं केला देवी
वार्ड नंबर-16 विकास नगर की रहने वाली 68 वर्षीय केला देवी ने बताया कि दो बेटे और दो बेटियों की मां हैं। छोटे बेटे की मौत हो गई। बेटियों और बेटे की शादी हो गई। करीब 23 साल पहले पति चल बसे। जिसके बाद बेटे-बहू ने बोझ समझकर घर से उन्हें निकाल दिया। अकेली दर दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। कई बार बेटे बहू की शिकायत पुलिस को भी दी, लेकिन सुनवाई नहीं हो सकी। हर तरफ से उम्मीद का दरवाजा बंद होने के बाद से केला देवी अब किराए के कमरे पर अपने जिंदगी के अंतिम पल बिता रही हैं। विधवा पेंशन के 2500 रुपये मिलती है। इसी से खर्च चलता है।
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