कृषि कानूनों के विरोध में वीरवार को पानीपत से करीब पांच हजार गाड़ियों में 25 हजार से ज्यादा किसानों का दो किलोमीटर लंबा काफिला सिंघु बार्डर दिल्ली के लिए रवाना हुआ। इस कारण शहर में जाम की स्थिति रही। प्रशासनिक अफसरों को पुलिस के साथ खासी मशक्कत भी करनी पड़ी। किसानों का सिवाह, समालखा, पट्टीकल्याणा में जोरदार स्वागत किया गया। उधर, ब्लॉक इसराना के गांव गवालड़ा के किसानों ने साथी किसानों को मीठा पानी पिलाया और उनका स्वागत किया। इसके साथ ही वे भी काफिले में शामिल होकर सिंघु बॉर्डर के लिए रवाना हो गए।
सुबह करीब 9 बजे के युवा किसान नेता बाइक और कार लेकर पानीपत टोल पर पहुंचना शुरू हो गए थे। सुबह 10 बजे से रागनी का कार्यक्रम शुरू हो गया। सवा 11 बजे भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी पानीपत टोल पहुंचे। उन्होंने किसानों को संबोधित किया। इसके बाद किसानों ने सिंघु बार्डर दिल्ली के लिए कूच किया। समालखा संवाद के अनुसार, चढ़ूनी ने कहा कि पानीपत में तीन युद्ध हुए थे और अब चौथा युद्ध किसान अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सभी वर्गों से किसान एकजुट होकर अपने हक के लिए खड़ा हो गया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने किसानों से बात करनी बंद कर दी है जबकि उनकी वही मांगें हैं। आरोप लगाते हुए कहा कि 11 बार वार्ता के बाद भी सरकार कृषि कानून के लाभ बताने में असमर्थ रही है।
बताते हैं कि इस ऐतिहासिक दिल्ली कूच के लिए भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) ने 20 दिन तक मेहनत की। चढ़ूनी ने दावा किया कि प्रदेश से अब तक हुईं दिल्ली कूच में पानीपत ने 25 हजार किसानों के काफिले के साथ रिकार्ड बनाया है। करनाल और अंबाला का रिकॉर्ड तोड़ा है। इसी प्रकार जिला अध्यक्ष सुधीर जाखड़ ने भी सरकार के खिलाफ गुस्सा दिखाया। कहा कि वह पानीपत के किसानों को कमजोर समझने की कोशिश न करें। चेतावनी देते हुए कहा कि पानीपत के किसी भी गांव में कोई सत्ता पक्ष का नेता घुसने या अपना कोई कार्यक्रम करने की कोशिश करेगा तो उसे मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। सरकार बार-बार अपने कार्यक्रम करके किसानों को भड़काने की कोशिश कर रही है।
किसान यूनियन ने की काफिले की अगुवाई
पानीपत में दिल्ली कूच के लिए काफिले की अगुवाई के लिए विशेष तौर पर निहंग सेना बुलाई गई थी, लेकिन बाद में फैसला लिया गया कि भारतीय किसान यूनियन के नेता ही अगुवाई करेंगे। सबसे पहले युवाओं की बाइक का काफिला था। जिसके पीछे खुली जीप में प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी, जिला अध्यक्ष सुधीर जाखड़, प्रदेश उपाध्यक्ष सत्यावान नरवाल और अन्य किसान नेता गाड़ियों में रहे। जिसके बाद चार हजार गाड़ियों का काफिला था वहीं समालखा क्रॉस करने तक किसानों का काफिला पांच हजार से ज्यादा गाड़ियों का हो गया था। सबसे पीछे निहंग सेना चल रही थी।
फ्लाईओवर के ऊपर से काफिले पर की गई पुष्प वर्षा
फ्लाईओवर के ऊपर से किसानों पर पुष्प वर्षा की गई। पुष्प वर्षा पानीपत टोल प्लाजा से लेकर सिवाह तक की गई। पानीपत के किसान ने अपने बाग से फूल लेकर आए थे। किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष का कहना है कि पहली बार किसानों ने इतनी शानदार तरीके से दिल्ली कूच किया गया।
पानीपत से 2 घंटे 50 मिनट में काफिला पहुंचा सिंघु बॉर्डर
पानीपत से काफिला 2 घंटे 50 मिनट में सिंघु बॉर्डर पहुंचा। आमजन को परेशानी नहीं हो, इसके लिए स्वागत के दौरान काफिले को बहुत देर कहीं भी रोका नहीं गया। पानीपत टोल पर भी आमजन को रास्ता देने का भी काम किया गया था। इस दौरान भारी पुलिस बल भी तैनात रहा।