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नौ माह गर्भ में रखकर पांच दिन देखभाल नहीं कर सकी मां, बेटी को एक मकान के सामने छोड़ा

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नौ माह तक बच्चे को गर्भ में रखने वाली मां की ममता को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। मां अपनी करीब पांच दिन की बेटी को वधावाराम कॉलोनी स्थित एक मकान के सामने छोड़कर चली गई। वीरवार रात मकान मालकिन ने बच्ची के रोने की आवाज सुनी तो वह बाहर निकली। बच्ची सूती कपड़ों में लिपटी थी। मालकिन ने बच्ची को गोद में उठाया और उसे अंदर ले गई। पूरी रात उसकी देखभाल की और सुबह होने पर पुलिस को सूचना दी। सीडब्ल्यूसी और पुलिस की टीम ने मिलकर बच्ची को अस्पताल में भर्ती कराया।
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वधावाराम कॉलोनी निवासी मरजीना पत्नी मुरशीद ने बताया कि तीन जून की रात करीब 11 बजे वह मकान की छत से नीचे आई थी। जैसे ही दरवाजे के पास पहुंची तो उसे बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। बाहर देखा तो नवजात बच्ची मिली। जिसके बाद उसने आस-पड़ोस के लोगों को इकट्ठा किया और पूछताछ की, लेकिन देर रात होने की वजह से कोई सुराग नहीं लग सका। इसके बाद वह बच्ची को घर के अंदर ले गई और उसे दूध पिलाया। दूध पीकर बच्ची सो गई। सुबह उठकर उसने अपने भाई अफरोज को किला थाने भेजा और सूचना देकर आने की बात कही। जहां से पुलिस और सीडब्ल्यूसी की टीम आई। बच्ची को सामान्य अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में भर्ती कराया। डॉक्टर के अनुसार बच्ची की हालत नाजुक है, शरीर पर लाल निशान है, बच्ची करीब पांच दिन की है।
महज एक रात में ही मरजीता को हो गया बच्ची से लगाव
एक रात में ही मासूम ने अपनी मुस्कान से देखभाल करने वाली मरजीना का दिल जीत लिया। मरजीना ने बताया कि उनका एक रात में मासूम के साथ ऐसा जुड़ाव हुआ कि वह उसे अपने से दूर नहीं करना चाहती। प्रशासन से अपील है कि बच्ची को उनको सौंप दिया जाए। वह उसकी परवरिश के लिए तैयार है। बता दें कि मरजीना मैट बनाने की एक फैक्टरी में काम करती हैं, उसके दो बेटे हैं, जिनकी आयु करीब 23 और 25 साल है।
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चार परिवार बच्ची को गोद लेने के लिए आ चुके हैं सामने
सीडब्ल्यूसी अधिकारी डॉ. मुकेश आर्य ने बताया कि पुलिस को कार्रवाई कर रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा है। पुलिस की रिपोर्ट मिलते ही वह टाइम पीरियड रखेंगे। विज्ञापन के माध्यम से लोगों को सूचना देंगे। जिसका बच्चा है, वो आकर ले जाए। अगर कोई सामने नहीं आता है तो पुलिस और सीडब्ल्यूसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद बच्ची को अडाप्शन प्रोसेस में लाया जाएगा। अधिकारी ने बताया कि अब तक चार परिवार बच्ची को गोद लेने के लिए सामने आ चुके हैं।
परवरिश नहीं होती तो बच्चे को न फेंके, सीडब्ल्यूसी से करें संपर्क : मुकेश आर्य
सीडब्ल्यूसी अधिकारी मुकेश आर्य ने बताया कि माता-पिता किसी कारण बच्चे की परवरिश नहीं कर पा रहे हैं तो उसे लावारिस हालत में न छोड़े। उनकी जान को खतरा हो सकता है। मई माह में रिसालू रोड पर एक मासूम को कुत्तों ने नोंच नोंच कर मार डाला था। इसलिए हर माता-पिता से अपील है कि वह बच्चे को सीडब्ल्यूसी के पास लेकर आएं। उनसे कोई सवाल नहीं किया जाएगा। सरकार की स्कीम के तहत बच्चे को अडॉप्ट किया जाएगा।
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