जिले में ब्लैक फंगस के पिछले 7 दिंन में 30 संदिग्ध रोगी मिल चुके हैं। इनको खानपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया जा चुका है। जहां इनका इलाज चल रहा है। वीरवार को ब्लैक फंगस की स्क्रीनिंग कमेटी ने 25 लोगों की जांच की। दो लोगों में ब्लैक फंगस के सभी लक्षण मिले हैं। इन्हें डॉक्टरों ने खानपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया है। अब तक जितने जिले में मरीज मिले हैं, उनमें से 80 प्रतिशत रोगी कोरोना संक्रमित रह चुके हैं और उन्हें स्टेरॉयड के इंजेक्शन दिए गए थे।
अब डॉक्टरों के लिए चिंता का बड़ा विषय यह है कि लोग ब्लैक फंगस के लक्षण आने के काफी दिन बाद जांच कराने पहुंच रहे हैं। इसलिए उनकी हालत गंभीर हो रही है। जिले में अब तक ब्लैक फंगस से दो संदिग्ध रोगियों की मौत भी हो चुकी है। जिनकी स्वास्थ्य विभाग हिस्ट्री जांच रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अब जिले में ब्लैक फंगस एक कंफर्म केस है, जबकि ब्लैक फंगस के मरीजों की जांच करने वाली कमेटी ने अब तक 30 संदिग्ध रोगियों को खानपुर मेडिकल कॉलेज में एमआरआई, बायोप्सी और एंडोस्कोपी के लिए रेफर किया है। इन सभी में ब्लैक फंगस के सभी लक्षण थे।
नाक में इंफेक्शन से शुरू होता है ब्लैक फंगस
डॉ. शिवांजलि ने बताया कि ब्लैक फंगस नाक में इंफेक्शन से शुरू होता है। मरीज की नाक से मवाद बहने लगता है। सिर में दर्द होता है। इसके बाद यह आंखों पर अटैक करता है। ज्यादा समय तक बीमारी को लापरवाही से लेने पर यह दिमाग तक पहुंच जाता है।
ब्लैक फंगस को कंट्रोल करने का प्रयास जारी : डॉ. कादियान
जिन रोगियों में लक्षण हैं, उनको रेफर किया जा रहा है। लोगों से अपील है कि वे डॉक्टरों के परामर्श को मानें। ब्लैक फंगस को लेकर कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। लोगों को जागरूक किया जा रहा है। बिना डॉक्टरों के पर्चे के स्टेरॉयड देने वाले मेडिकल स्टोर पर ड्रग कंट्रोलर की कार्रवाई जारी है।
-डॉ. जितेंद्र कादियान, सिविल सर्जन, पानीपत।