निंबरी डंपिंग स्टेशन पर कूड़ा पृथीकरण और इससे जैविक खाद बनाने के 28 करोड़ के टेंडर से शहर की सरकार पहले ही नाराज चल रही है। काम देरी से शुरू करवाने पर करीब पौने दो करोड़ की जुर्माना भी लगाया जा चुका है। अब फिर से विवाद सामने आ गया है। सात अप्रैल तक इसका काम ठेका कंपनी को पूरा करना था, जो अब तक केवल 20 प्रतिशत ही पूरा हो सका है। दूसरी ओर कंपनी ने भुगतान के लिए बिल तैयार कर निगम कार्यालय भेज दिए हैं। इससे जनप्रतिनिधियों की नाराजगी बढ़ गई है। एक बार फिर से इसके भुगतान को रोकने के लिए शहर की सरकार बैठक कर सकती है।
निगम सदन की बैठक में भी पार्षदों ने इस टेंडर को रद्द करने की मांग उठाई थी, लेकिन निगम ने दो टूक जवाब दिया था कि वे इसे रद्द नहीं कर सकते। सिर्फ सरकार को सदन के जरिए इसे रद्द करने की अपनी सहमति ही भेज सकते हैं। जिस पर सदन ने प्रस्ताव पास करते हुए दूसरा टेंडर लगवाने की मांग भी की थी और तब तक इस योजना में किसी भी प्रकार के भुगतान पर रोक लगाने की बात कही गई थी। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि अब निगम अधिकारी फिर से इसका भुगतान करने का प्रयास कर रहे हैं।
पौने दो करोड़ लगाया जुर्माना, जेबीएम को कूड़ा डालने की थी मनाही
निगम ने सदन को बताया था कि देरी से काम शुरू करवाने पर कंपनी को पौने दो करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है। वहीं, कूड़ा वेरिफाई करने के लिए कि कौन सा कूड़ा निगम ने डंपिंग यार्ड में डाला है और कौन सा कूड़ा जेबीएम ने डाला है, इसके लिए जेबीएम कंपनी को लिजेसी वेस्ट की साइट पर कूड़ा डालने के लिए मना किया गया था, लेकिन निगम के इन आदेशों का आज तक पालन नहीं हो सका।
बोले पार्षद- निगम को देना होगा जवाब
निगम पार्षद लोकेश नांगरू, अश्वनी धींगड़ा, योगेश डाबर समेत कई अन्य पार्षदों ने कहा कि वे इसका भुगतान नहीं होने देंगे। इसके बारे में निगम से जवाब तलब किया जाएगा। निगम सदन पहले दिन से ही इस काम के विरोध में था, बावजूद इसके निगम ने इस काम को चलाए रखा। सदन में इसकी पेमेंट तक रोकने की बात रखी गई थी। अगर निगम पेमेंट करता है तो सदन को इसका जवाब देना होगा। इसके लिए जल्द ही बैठक कर आगामी रणनीति के लिए फैसला लिया जाएगा।