फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गति समीकरण का प्रभाव, इस बार दो दिन मनाई जाएगी धनतेरस

विज्ञापन
विज्ञापन
दीपों के पर्व दीपावली की शुरूआत धनतेरस के साथ हो जाती है, जो पांच दिन तक चलती है। धनतेरस कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाता है, तो दीपावली से दो दिन पहले आता है। इस बार धनतेरस पर चित्रा नक्षत्र और आयुष्मान योग भी बन रहे हैं। इन योगों में पूजा व खरीदारी करना शुभ माना जाता है। इस बार धनतेरस गति समीकरण के चलते दो दिन मनाई जाएगी क्योंकि त्रयोदशी तिथि 12 नवंबर को रात्रि 9 बजकर 31 मिनट से शुरू होकर 13 नवंबर को सायं 6 बजकर 01 मिनट तक जारी रहेगी।
विज्ञापन

पर्व को दो दिन मनाए जाने के पीछे विद्वानों के अलग-अलग तर्क हैं। हालांकि अधिकांश विद्वान 13 नवंबर को धनतेरस मनाना शास्त्र सम्मत बता रहे हैं। विद्वानों कहना है कि 12 को द्वादशी तिथि शाम 6.18 बजे तक रहेगी। इसके बाद त्रयोदशी तिथि लगेगी। त्रयोदशी 12 को प्रदोषकाल में त्रयोदशी रहने से इस दिन ही धनतेरस मानी जानी चाहिए। इधर 13 नवंबर को धनतेरस मानने के पीछे विद्वानों का तर्क है कि त्रियोदशी तिथि 12 को रात 9.33 बजे शुरू होगी जो 13 नवंबर को शाम 6.01 बजे तक रहेगी। 13 को त्रियोदशी उदयाकाल और प्रदोषकाल दोनो समय रहेगा। इसके चलते 13 को धनतेरस मनाई जानी चाहिए। इसके अलावा 13 को धनतेरस मानी जाती है तो पांच दिनी दीपावली इस बार चार दिन की हो जाएगी।
समृद्धि के लिए बर्तन की खरीदारी, आरोग्यता के लिए भगवान धनवंतरी का पूजन
अवध धाम मंदिर से ज्योतिषाचार्य पंडित राधे-राधे के मुताबिक कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को देव वैद्य भगवान धनवंतरी का अवतरण हुआ था। उनके चार हाथ हैं। इनमें अमृत कलश, औषधि, शंख-चक्र आदि हैं। इस दिन आरोग्यता की कामना से भगवान धनवंतरी का पूजन किया जाता है। इन्हें भगवान विष्णु का अवतार भी माना जाता है। धनतेरस दो शब्दों से मिलकर बना है। कहा जाता है इस दिन धन को तेरह गुणा करने के लिए लक्ष्मी, कुबेर और अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति के लिए यम को दीपदान करना चाहिए।
विज्ञापन

इसलिए खरीदे जाते हैं बर्तन व ज्वैलरी
पंडित राधे-राधे ने बताया कि कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को क्षीर सागर मंथन से मां लक्ष्मी, कुबेर और धनवंतरी प्रकट हुए। उस समय उनके हाथों में अमृत से भरा कलश था। धनवंतरी के कलश लेकर प्रकट होने के कारण ही इस दिन बर्तन खरीदने की परंपरा है। इसलिए इस दिन विशेषकर पीतल और चांदी के बर्तन खरीदने चाहिए, क्योंकि पीतल महर्षि धनवंतरी का धातु है। इससे घर में आरोग्य, सौभाग्य और स्वास्थ्य लाभ होता है।
धनतेरस की पूजा विधि
पंडित राधे-राधे ने बताया कि संध्याकाल में पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। पूजा के स्थान पर उत्तर दिशा की तरफ भगवान कुबेर और धनवंतरी की मूर्ति स्थापना कर उनकी पूजा करनी चाहिए। इनके साथ ही माता लक्ष्मी और भगवान श्रीगणेश की पूजा का विधान है। मान्यता है कि भगवान कुबेर को सफेद मिठाई, जबकि धनवंतरी को पीली मिठाई का भोग लगाना चाहिए, क्योंकि धनवंतरी को पीली वस्तु अधिक प्रिय है। पूजा में फूल, फल, चावल, रोली, चंदन, धूप व दीप का प्रयोग करना फलदायक रहता है। पंडित पाठक बताते हैं कि धनतेरस पर कलश, हल्दी की गांठ, झाड़ू खरीदना बेहद शुभ माना जाता है।
धनतेरस का शुभ मुहूर्त
धनतेरस का शुभ मुहूर्त 12 नवंबर रात्रि 11.30 बजे से 01.00 बजे तक, उसके बाद 01.07 बजे तक रहेगा। उसके उपरांत रात्रि 2.45 बजे से सुबह 5.57 बजे तक रहेगा। 13 नवंबर को सुबह 5.59 बजे से 10.06 बजे तक और 11.08 बजे से 12.51 बजे तक है। इसके अलावा दिवा दोपहर बाद 3.38 बजे से सांय 5.00 बजे तक रहेगा। इस समय खरीदारी कर सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें