शहर में हो चुके विकास कार्यों के निगम पर करीब 80 करोड़ से ज्यादा की बकायादारी खड़ी है, जिसे निगम चुकाने में हर बार असमर्थ साबित हो जाता है। वहीं, ठेकेदारों को उनकी पेमेंट न मिलने से वे आगे विकास कार्यों को जारी रखने में असमर्थता जताते हैं और बार-बार निगम कार्यालयों में पेमेंट को निकवालने के लिए चक्कर काटते रहते हैं। नतीजन शहर के लंबित विकास कार्य पूरे नहीं हो पा रहे हैं।
वहीं, निगम कार्यालय में चर्चा रही कि ग्रामीण क्षेत्र के एक बड़े ठेकेदार ने करीब चार करोड़ रुपये के कामों को सरेंडर कर दिया है। जिससे निगम में हड़कंप मच गया है। इनमें वार्ड नंबर 26 के भी कई विकास कार्य हैं। जबकि निगम अधिकारियों ने इससे साफ मना करते हुए कहा कि निगम एक्ट में काम को सरेंडर करने का कोई प्रावधान नहीं किया गया है। जब इस बारे में ठेकेदार से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि वे इस विषय पर अभी बात नहीं कर सकते।
सूत्रों के मुताबिक निगम पर ठेकेदार के शहर में किए गए विकास कार्य करीब दस से बारह करोड़ रुपये बकाया है। इसमें से करीब चार करोड़ के काम अधर में लटके हुए हैं। इनको पूरा करने के लिए ठेकेदार निगम से बजट मांग रहा था। ये बजट उसके काम के ही बिलों पर पास किया जाना था, लेकिन निगम अधिकारियों ने बिल पास नहीं किए। इस कारण खफा ठेकेदार ने निगम के विकास कार्यों को लाल झंडी दिखा दी।
निगम के खिलाफ ठेकेदार हो सकते हैं एकजुट
बता दें कि नगर निगम में ऐसे करीब 50 से भी ज्यादा ठेकेदार हैं। बकाया को लेकर ठेेकेदार स्थानीय नेेताओं से लेकर निगम हूकमरानों तक गुहार लगा चुके हैं, लेकिन हर बार असफल रहे। अब सभी ठेकेदार एकजुट होकर निगम के खिलाफ मोर्चा खोलने की प्लानिंग कर रहे हैं।
इस बारे में कोई सूचना नहीं है। वहीं, निगम एक्ट में किसी भी ठेका एजेंसी या अन्य किसी कार्य को सरेंडर करने जैसी चीजें नहीं होती। अगर एक बार काम ले लिया तो उसे पूरा करना होगा। अगर ऐसी कोई सूचना मिलेगी तो उस पर बातचीत कर समाधान करने का प्रयास किया जाएगा।
महिपाल सिंह, चीफ इंजीनियर, नगर निगम पानीपत।