फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चक्रवात 'अर्नब': दिल्ली-एनसीआर व हरियाणा पर असर, हल्की बारिश और ठंड का अहसास; किसानों की चिंता बढ़ी

Thu, 29 Oct 2026 09:31 AM IST
Naveen अमर उजाला नेटवर्क, हरियाणा

सार

हरियाणा में मौसमी बदलाव के कारण हरियाणा, एनसीआर और दिल्ली में दिन और रात के तापमान में गिरावट आने की उम्मीद है। तापमान सामान्य से नीचे रहने की संभावना है, जिससे ठंड का अहसास बढ़ेगा।
विज्ञापन
मौसम (सांकेतिक) - फोटो : संवाद
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

चक्रवात 'अर्नब' और पश्चिमी विक्षोभ के संयुक्त प्रभाव से दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा के कई जिलों में मौसम ने करवट ली है। गुरुवार तड़के सुबह से ही आसमान में बादल छाए रहे और कई इलाकों में बूंदाबांदी हुई, जिससे तापमान में गिरावट आई है और ठंड का अहसास बढ़ गया है। मौसम विभाग ने 29 से 31 अक्तूबर तक के लिए ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है।

विज्ञापन


मौसम में बदलाव और बारिश की संभावना
मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बना चक्रवातीय तूफान 'अर्नब' और उत्तर भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण मौसम में यह बदलाव आया है। इस प्रणाली के प्रभाव से हरियाणा और एनसीआर में नमी की मात्रा बढ़ी है, जिससे बारिश की संभावना है।

विज्ञापन


उत्तरी जिलों में हल्की से मध्यम बारिश की उम्मीद
पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर, करनाल, पानीपत, सोनीपत, फरीदाबाद और पलवल जैसे उत्तरी जिलों में तेज हवाओं के साथ गरज-चमक और हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है।

अन्य जिलों में बिखराव वाली बारिश
कैथल, रोहतक, झज्जर, गुरुग्राम, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, भिवानी, चरखी दादरी और जींद में भी बादलों की आवाजाही के साथ तेज हवाओं के बीच बिखराव वाली हल्की बारिश या बूंदाबांदी हो सकती है।

किसानों की चिंता बढ़ी
मौसम में अचानक आए इस बदलाव ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है, खासकर उन किसानों की जिनकी धान की फसल कटाई के लिए तैयार है या कट चुकी है। पानीपत और यमुनानगर जैसे इलाकों से आई खबरों के अनुसार, सुबह हुई बूंदाबांदी से मंडियों में खुले में रखे धान की बोरियों के भीगने का खतरा मंडराने लगा है। किसानों को अपनी फसल को बचाने के लिए तिरपाल आदि का सहारा लेना पड़ रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे कटी हुई या पकी हुई फसल को सुरक्षित स्थानों पर रखें और नमी बढ़ने पर कटाई रोक दें।

तापमान में गिरावट और ठंड का अहसास
इस मौसमी बदलाव के कारण हरियाणा, एनसीआर और दिल्ली में दिन और रात के तापमान में गिरावट आने की उम्मीद है। तापमान सामान्य से नीचे रहने की संभावना है, जिससे ठंड का अहसास बढ़ेगा।

मौसम विभाग की चेतावनी
मौसम विभाग ने 29 से 31 अक्तूबर तक के लिए ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है। इस दौरान तेज हवाएं चलने और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि की भी संभावना है। लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

Trending Videos
विज्ञापन

फिर बदला मौसम, अनाजमंडियों में खुले में पड़े धान पर मंडराया खतरा

जिले में मौसम ने एक बार फिर करवट बदल ली है। बृहस्पतिवार सुबह से ही आसमान में बादल छाए रहने और हल्की बूंदाबांदी होने से अनाजमंडियों में खुले में पड़े धान पर बारिश का खतरा मंडराने लगा है। इससे किसानों और आढ़तियों की चिंता बढ़ गई है। मंडियों में अभी भी करीब एक लाख मीट्रिक टन (एमटी) धान उठान के इंतजार में पड़ा है। ऐसे में यदि बारिश तेज होती है तो धान के भीगने से किसानों और आढ़तियों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। मौसम में बदलाव से तापमान में भी कमी आई है, जिससे ठंडक का भी एहसास होने लगा है।

चार दिन पहले हुई बारिश के दौरान भी अनाजमंडियों में खुले में पड़ा करीब दो लाख एमटी धान भीग गया था। अब मौसम में दोबारा बदलाव होने से मंडियों में रखी धान की फसल को सुरक्षित रखने की चुनौती खड़ी हो गई है। किसानों और आढ़तियों को आशंका है कि यदि समय रहते धान का उठान नहीं हुआ और बारिश का दौर बढ़ा तो उन्हें फिर से परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

उठान में देरी बढ़ा रही परेशानी
अनाजमंडियों में धान की आवक के बीच उठान में देरी होने से खुले में रखी फसल की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। करीब एक लाख एमटी धान का उठान बाकी होने के कारण मंडियों में बड़ी मात्रा में धान खुले में पड़ा है। ऐसे में मौसम खराब होने से नुकसान की आशंका बढ़ गई है।

चार दिन पहले भी भीगा था धान
चार दिन पहले हुई बारिश के दौरान भी मंडियों में खुले में पड़ा करीब दो लाख एमटी धान भीग गया था। अब दोबारा बादल छाने और बूंदाबांदी होने से किसानों व आढ़तियों की चिंता फिर बढ़ गई है। उनकी निगाहें मौसम पर टिकी हैं। वहीं, मंडियों में पड़े धान का जल्द उठान होना जरूरी है, ताकि बारिश की स्थिति में फसल को नुकसान से बचाया जा सके।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें