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फसल के साथ खाक हुए सपने, फसल बीमा का क्लेम भी नहीं मिला

Sun, 23 Apr 2017 11:51 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, पानीपत।
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पानीपत - फोटो : पानीपत
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संजीव नैन
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पानीपत। खाद्य एवं नियंत्रक विभाग मंडियों में गेहूं की बंपर आवक पहुंचने से खुश हैं तो अप्रैल में सैकड़ों एकड़ गेहूं की फसल आग से जलने के कारण किसानों के सपने टूट गए हैं। अब किसान मुआवजे को लेकर सीएम विंडो से लेकर उच्च अधिकारियों तक दरवाजे खटखटा चुके हैं। लेकिन, उनकी आंखों से निकले वाले आंसुओं को रोकने के लिए कोई भी दम नहीं भर रहा है। मेहनत करके अन्न पैदा करने वाले किसान फिलहाल मुश्किल में फंसे हुए है। पूठर गांव के एक किसान ने अपना दर्द बयां करते हुए सरकार और प्रशासन को खूब कोसा। उसके खाते से दो बार सात हजार रुपये बिना जानकारी दिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के नाम पर भी काट लिए गए। अब बात मुआवजा देने की आई तो सरकार और अधिकारी पल्ला झाड़ने में लग गए हैं। वेदपाल की बिजली की चिंगारी गिरने से 20 कनाल नौ मरले गेहूं की फसल आग की भेंट चढ़ गई। जिले के ऐसे दर्जनों किसान दर-दर की ठोकर खाने को मजबूर हैं।
गांव पूठर निवासी किसान वेदपाल ने अमर उजाला को बताया कि कड़ी मेहनत से उसने गेहूं की फसल बिजाई की। छह माह तक दिन-रात देखरेख करता रहा। जब फसल पूरी तरह से पककर तैयार हुई तो उसकी कटाई करने के लिए तैयारी भी शुरू कर दी है। लेकिन, एक दिन पहले ही नौ अप्रैल रविवार दोपहर एक बजकर 10 मिनट पर बिजली की स्पार्किंग गिरने से उसकी 20 कनाल 9 मरले यानी ढाई एकड़ से ज्यादा गेहूं की फसल आग की भेंट चढ़ गई। देखते ही देखते उसके सामने उसका सोना जलकर राख हो गया। माथे पर हाथ रखकर जमीन पर बैठे किसान वेदपाल का कहना है कि फसल जलने के बाद थोड़ी आस उन्हें प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से लगी। बैंक में मुआवजे के बारे में पूछा तो अधिकारियों ने हाथ खड़े कर दिए। बोले कि बीमे में प्राकृतिक कारणों से लगी आग से ही मुआवजा देने का प्रावधान है। यह सुनकर उनके होश उड़ गए। हालांकि, संबंधित पटवारी ने उनकी जली फसल का मुआयना कर रिपोर्ट बनाई है। इसके बाद उसने सीएम विंडो पर प्रार्थना पत्र दिए। कई बार प्रशासनिक अधिकारियों के पास पहुंचे, लेकिन कुछ नहीं हुआ। पीड़ित वेदपाल हरियाणा सरकार व प्रशासनिक अधिकारियों से न्याय के साथ मुआवजा देने की गुहार लगा रहा है।      
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देना पड़ेगा ब्याज       
फसल बिजाई के दौरान आढ़ती से लिए रुपयों का उसे ब्याज भुगतना पड़ेगा। घर का खर्चा अलग से। वेदपाल का कहना है कि उसकी फसल जलने का सरकार मुआवजा दे दे तो बहुत सी परेशानी कम हो सकती है। लेेकिन, सरकार ने उसके खातों से सात हजार रुपये काट लिए।
आग ने खाक किए सपने      
वेदपाल के दो बच्चे हैं। इनमें से लड़का दसवीं और लड़की आठवीं कक्षा में है। इनकी पढ़ाई और ढाई एकड़ में फसल बिजाई उसके लिए चुनौती बन गई है। गेहूं जलने से उसकी भविष्य के लिए बनाई गई योजनाएं भी खाक हो चुकी हैं।
बैंक वाले बोले, जनाब हम क्या करें..?      
पीड़ित किसान वेदपाल ने फसल जलने के बाद बैंक अधिकारियों से मुआवजे की मांग की। लेकिन, बैंक अधिकारी बोले, जनाब हम क्या करें? यह सिस्टम ऊपर से चलता है। सरकार के आदेश के अनुसार ही काम करते हैं। इस पर वह लौट आया। वेदपाल ने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में अभी तक उनके खाते से सात हजार रुपये के करीब काटे जा चुके है। जब उन्हें फसलों के बीमे के तौर पर अब मुआवजा नहीं दिया जा रहा है। सरकार को नियमों की पूरी जानकारी पहले देनी चाहिए थी।
जिले में गेहूं की फसल में लगी आग का ब्योरा      
क्षेत्र    एकड़      
पानीपत    280      
मतलौडा    80      
कुराना    125      
उरलाना    132      
इसराना    210      
समालखा    70      
बापौली    150      
नोट : जिले में फसल जलने का आकड़ा दमकल विभाग की सूचना पर आधारित है।

किसानों को जली फसल का मुआवजा प्रधानमंत्री राहत कोष से दिलाने के प्रयास हैं। साथ ही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में कई खामियों को दूर करने के लिए भी सरकार से बातचीत जारी है। इसके प्रति केंद्र और हरियाणा की सरकार गंभीर है। किसानों के हितों को देखकर सरकार कई अन्य योजनाएं भी बना रही है।
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संजीव दहिया, जिला अध्यक्ष भाजपा किसान मोर्चा।      

सरकार किसानों के साथ धोखा कर रही है। सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के नाम पर किसानों से हजारों रुपये हड़पे हैं। जब मुआवजा देने की बारी आई तो पल्ला झाड़ लिया। सरकार को पीड़ित किसानों को जल्द मुआवजा देना चाहिए। किसानों को जली फसलों को मुआवजा जल्द से जल्द नहीं दिया तो भारतीय किसान यूनियन संघर्ष के रास्ते पर उतर आएगी।
बिंटू मलिक, उपाध्यक्ष, भाकियू।
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