सहकारिता विभाग में एकीकृत सहकारी विकास परियोजना (आईसीडीपी) में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले में फंसे दो और सहायक रजिस्ट्रार को निलंबित कर दिया है। सहायक रजिस्ट्रार कृष्ण चंद्र घोटाले के समय करनाल और जितेंद्र कौशिक कैथल में तैनात थे। दोनों काे पंचकूला मुख्यालय अटैच किया है। इनको करनाल जिला जेल में निलंबन के आदेश रिसीव कराए गए हैं। दोनों एआर को एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने पहले ही गिरफ्तार कर लिया था।
जानकारी के अनुसार सहकारिता विभाग ने सहायक रजिस्ट्रार कृष्ण चंद्र और जितेंद्र कौशिक के निलंबन के आदेश जारी किए हैं। इनसे पहले सहायक रजिस्ट्रार अनु कौशिश, डिप्टी रजिस्ट्रार (मंडल) रोहित गुप्ता, एओ बलविंद्र और एआर डॉ. रामकुमार को निलंबित किया जा चुका है।
मुख्यालय से कृष्ण चंद्र और जितेंद्र कौशिक के निलंबन के आदेश मिलने के बाद इनको रिसीव कराने के लिए अधिकारियों व कर्मचारी को भी दौड़ना पड़ा। प्रारंभिक सूचना में दोनों अधिकारियों के अंबाला सेंट्रल जेल में होने की सूचना मिली। इसके बाद जेल अधिकारियों ने दोनों के जेल में न होने की जानकारी दी।
इसके बाद कैथल, पानीपत और अन्य जेलों में उनके बारे में पता करने का प्रयास किया। बाद में दोनों अधिकारी करनाल जिला जेल में मिले। दोनों अधिकारियों से निलंबन के आदेशों को रिसीव कराकर मुख्यालय भेजा गया। विदित है कि आईसीडीपी योजना में घोटाले की परतें खुलने के बाद एंटी करप्शन ब्यूरो ने सहायक रजिस्ट्रार कैथल जितेंद्र कौशिक को 31 जनवरी और कृष्ण चंद्र को एक फरवरी को गिरफ्तार किया था।
डॉ. रामकुमार पर दूसरा मुकदमा दर्ज
एंटी करप्शन ब्यूरो ने पानीपत में आईसीडीपी में करोड़ों के घोटाला के आरोपी सहायक रजिस्ट्रार रामकुमार पर दूसरा मुकदमा दर्ज किया है। उन पर पहला मुकदमा रेवाड़ी में घोटाला सामने आते ही दर्ज किया गया था। उनके बैंक खाते में अनु कौशिश के खाते से रुपये ट्रांसफर होना पाया गया था। उनको रेवाड़ी में दर्ज मुकदमे में जमानत मिल गई थी। एंटी करप्शन ब्यूरो करनाल ने उन पर पानीपत में घोटाला करने के आरोप में एक अन्य मुकदमा दर्ज किया था। एंटी करप्शन ब्यूरो ने आरोपी डॉ. रामकुमार को तीन फरवरी को पानीपत के घोटाले में गिरफ्तार किया था। एसीबी के अधिकारियों के सामने आरोपों को स्वीकार भी कर लिया था।