यूपी के प्रयागराज में माफिया अतीक और अशरफ की गोली मारकर हत्या करने वाले तीन शूटरों में एक शूटर अरुण मौर्य पानीपत जिले का भी है। अरुण करीब एक सप्ताह पहले घर से बिना कुछ बताए चला गया था। उसके चाचा ने कहा कि करीब एक सप्ताह पहले वह घर से चला गया था, इस दौराव वह गांव गया हुआ था। उन्हें कहीं से सुनने में आया था कि दिल्ली शादी में गया है। बताया जा रहा है कि पानीपत में दादा रहते हैं। अरुण के पास हथियार कहां से आया और किसने मुहैया कराया, इस संबंध में यूपी पुलिस उसे पानीपत लेकर आ सकती है, उसके परिवार से भी पूछताछ कर सकती है।
प्रयागराज में अतीक और उसके भाई अशरफ की हत्या करने के मामले में गिरफ्तार शूटर अरुण मौर्य के चाचा और दादा पानीपत के विकास नगर में रहते हैं। उन्होंने बताया कि अरुण मौर्य सात दिन पहले ही घर से चला गया था, इस दौराव वह गांव गया हुआ था। उन्हें कहीं से सुनने में आया था कि दिल्ली शादी में गया है। पिछले रविवार से उसका मोबाइल नंबर बंद आ रहा था। शनिवार रात अचानक उन्हें पता चला कि मौर्य ने हत्या की हैं।
एनएनएफ के विकास नगर में रहने वाले चाचा सुनील ने बताया कि वह अपने पिता मथुरा प्रसाद के साथ पानीपत में रहता है, जबकि उसका बड़ा भाई दीपक भी अपनी पत्नी केला और बड़े बेटे अरुण मौर्य व छोटे बेटे अनिकेत के साथ पानीपत में रहता था। आठ साल पहले वह पानीपत से कासगंज के कादरवाड़ी गांव में जाकर रहने लगे थे और वहीं पर खेतीबाड़ी करते हैं।
दीपक का बड़ा बेटा करीब साढ़े 17 वर्षीय अरुण मौर्य पानीपत में उनके पास ही रहता था। करीब एक साल से उसका यूपी में आना-जाना लगा रहता था। वह कुटानी रोड स्थित एक फैक्टरी में स्टीचिंग की मशीन चलाता था। पानीपत में अरुण मौर्य पर लड़ाई झगड़े और देशी कट्टा पकड़ने के मामले दर्ज हैं।
सुनील ने बताया कि पिछले शनिवार को वह पैतृक गांव कादरवाड़ी चला गया था। पिछले रविवार को अरुण घर पर दिल्ली में दोस्त की शादी में जाने की बात कहकर चला गया था। वह अपने साथ कपड़े नहीं ले गया था। उन्होंने फोन किया तो उसका नंबर बंद मिला। वह शुक्रवार को गांव से लौटकर पानीपत आ गया। शनिवार रात सूचना मिली कि उसके भतीजे अरुण ने दो दोस्तों के साथ मिलकर अतीक और उसके भाई अशरफ की हत्या कर दी।
सुनील ने बताया कि हत्याकांड के बाद पानीपत पुलिस ने उनके घर आकर पूछताछ की। इसमें उनका कोई हाथ नहीं है। वह कितने दिन से हत्या की प्लानिंग कर रहा था, इस संबंध में उसे कुछ नहीं पता है। वह भतीजे के इस कदम को गलत ठहराते है, उसको सजा मिलनी चाहिए।
दादा मथुरा प्रसाद बताते है कि पोता अरुण उनके साथ रहता था, वह इतनी बड़ी वारदात को अंजाम दे जाएगा। उसने कभी ऐसा सोचा भी नहीं था। वह कब आरोपियों के संपर्क में आया, कब हथियार लिए, इस बारे में उन्हें कुछ नहीं पता।
बता दें कि तीन में से एक शूटर अरुण मौर्य पुत्र दीपक कुमार उर्फ मैनेजर का जन्म पानीपत में हुआ था। उसका परिवार मूलरूप से यूपी के जिला कासगंज के गांव कादरवाड़ी का रहने वाला है। अरुण मौर्य कई वर्षों से पानीपत में अपने भाई व अन्य परिवार के लोगों के साथ रह रहा है। गांव में उसका आना जाना भी कम था।
पिता दीपक कुमार को इस बात की जानकारी नहीं थी कि उसके बेटे ने माफिया अतीक अहमद एवं अशरफ की हत्या कर दी है। सुबह नौ बजे तक दीपक कुमार उनकी पत्नी केला देवी और बेटी सपना गांव में थे और गोलगप्पे का ठेला लगाने की तैयारी कर रहे थे। जब सोशल मीडिया से सुबह आठ बजे के बाद उन्हें बेटे की करतूत की जानकारी मिली तो पूरा परिवार कुछ ही देर में घर से फरार हो गया। तब तक पुलिस भी उनके घर नहीं पहुंची थी।
पानीपत में करता था एक कंपनी में काम
शूटर अरुण मौर्य के पिता दीपक कुमार अपने पिता मथुरा प्रसाद के साथ काफी पहले से पानीपत में रहकर मजदूरी का काम करते थे। अरुण भी एक कंपनी में काम करता था। उनकी गांव में उनके पास डेढ़ बीघा जमीन है, जिससे गुजारा नहीं हो पाता था। आठ साल पहले दीपक कुमार गांव में चले आए। यहां आकर पहले ऑटो चलाया। कई वर्ष तक ऑटो चलाने के बाद ऑटो का एक्सीटेंड हो गया। उसके बाद से उन्होंने गोलगप्पे की रेहड़ी लगाना शुरू कर दिया।
दो भाई फरीदाबाद में करते है नौकरी
शूटर अरुण के दो छोटे भाई धमेंद्र और आकाश है, जो फरीदाबाद में रहकर कबाड़ खरीदने व बेचने का काम करते है। अरुण की चाची लक्ष्मी देवी और चाचा गांव में रहते है। पुलिस पूछताछ में चाची ने बताया कि कुछ दिनों पहले अरुण घर आया था, लेकिन उसके बाद वह घर नहीं आया।