अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। सीआईए-वन पानीपत ने रेर कलां गांव में नकली मॉबिल ऑयल की फैक्टरी के बाद गांव महाराना गांव में नकली बिनौला खल बनाने की फैक्टरी का भंडाफोड़ किया है। सीआईए वन ने फैक्टरी में छापा मारकर ट्रक से 400 और फैक्टरी से 800 बैग तैयार बिनौला खल बरामद की है।
पकड़ी गई खल की कीमत ढाई लाख रुपये आंकी जा रही है। आरोपी 60 रुपये में एक बैग खल तैयार करते देते थे और बाजार में करीब दस गुना मुनाफे में बेचते थे। सीआईए वन ने पशु चिकित्सकों को बुलाकर खल के 11 सैंपल जांच के लिए लैब भेज दिए हैं।
सीआईए वन ने फैक्टरी के मालिक, इलेक्ट्रशियन, इंजीनियर समेत चार को मौके से गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने चारों को कोर्ट में पेश किया, वहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस जोधपुर निवासी खल के खरीदार की तलाश कर रही है।
सीआईए-वन प्रभारी अजय मोर ने मंगलवार को नकली बिनौला खल बनाने वाली फैक्टरी को पकड़ा। इंस्पेक्टर अजय मोर ने बताया कि पुलिस को गांव महराना स्थित पूर्णिमा कॉटन वेस्ट कंपनी में नकली बिनौला खल बनाने की सूचना मिली थी।
उन्होंने टीम के साथ फैक्टरी में छापा मारा और वहां से मालिक समेत चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया। उनकी पहचान फैक्टरी के मालिक शंभूनाथ निवासी विद्यानंद कॉलोनी, इलेक्ट्रीशियन रामतीर्थ निवासी मीरा ओबालिया, इंजीनियर सतबीर सिंह निवासी अलोमाजरा, पटियाला और ट्रक चालक हनुमान राम निवासी लुनावास, जोधपुर के रूप में की।
टीम को फैक्टरी से भारी मात्रा में गुड़ और कपड़े का वेस्ट मिला। पुलिस ने फैक्टरी में पशु चिकित्सक डॉ. जनक और डॉ. रविंद्र को बुला लिया। उन्होंने खल के 11 सैंपल लेकर लैब भेज दिए। पुलिस ने फैक्टरी को सील कर दिया है।
तीन माह से चल रही थी फैक्टरी
सीआईए-वन प्रभारी अजय मोर ने बताया कि उन्होंने फैक्टरी के मालिक शंभूनाथ से फैक्टरी के कागजात और रजिस्ट्रेशन मांगे, तो वह नहीं दिखा सका। फैक्टरी तीन माह से अवैध रूप से चल रही थी।
ऐसी खल से पशुओं की हो सकती है मौत : विशेषज्ञ
डॉ. जनक ने बताया कि खल को बनाने के लिए वेस्ट कपड़ों और गले सड़े गुड़ का प्रयोग किया जा रहा था। ऐसी खल खाने से पशु तुरंत दूध देना बंद कर देता हैं। इससे पशु की मौत भी हो सकती है।
60 रुपये की लागत, 600 रुपये में बेचते थे
आरोपियों ने पुलिस पूछताछ में बताया कि फैक्टरी में सिर्फ कपड़ों के वेस्ट और गुड़ से ही खल बनाई जाती थी। उनका इस पर मात्र 60 रुपये की खर्च आता था। वे इसे 600 रुपये प्रति बैग बेचते थे। उनकी सप्लाई पानीपत, राजस्थान होती थी। वहां से आगे सप्लाई की जाती थी।
राजस्थान में बेचे जा चुके है नकली खल के हजारों कट्टे
सीआईए-वन प्रभारी अजय मोर ने बताया कि नकली खल हरियाणा की बजाय राजस्थान के जोधपुर, हनुमानगढ़, अलवर और जयपुर में सप्लाई की जाती थी। माफियाओं का सीधा संबध जोधपुर के एक व्यापारी से था। व्यापारी छह सौ रुपये के हिसाब से खल के बैग खरीदकर राजस्थान के कई जिलों में सप्लाई करता था।
फैक्टरी प्रबंधक से बना खल माफिया
फैक्टरी का मालिक शंभूनाथ एक साल पहले तक पानीपत की एक निजी फैक्टरी में मैनेजर था। उसने कई साल तक मैनेजर के पद में कार्य किया। वह जल्द ही अमीर बनना चाहता था। इसलिए उसने नकली बिनौला बनाना शुरू कर दिया।
कैथल की महादेव खल के मार्के का करते थे इस्तेमाल
नकली खल माफिया दिल्ली से कट्टों पर महादेव खल का मार्का लगवाते थे और उसे राजस्थान सप्लाई कर देते थे। किसी को खल पर शक न हो, इसलिए महादेव खल के मार्के का इस्तेमाल किया जाता था। यह कैथल का मशहूर मार्का है।
ऐसे तैयार होती थी नकली खल
पहले वेस्ट कपड़ों को मशीन में डाला जाता था। मशीन में कपड़ों के बारीक टुकड़े हो जाते थे। रूई नुमा कपड़ों में कैल्शियम और गुड़ मिलाकर ग्राइंड किया जाता था। वेस्ट और गुड़ जब खल जैसा लगने लगता, तो उसे बैगों में पैक कर देते थे।
वर्जन
पुलिस ने नकली खल बनाने वाले फैक्टरी मालिक समेत चार लोगों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। पुलिस खल माफिया से खल खरीदने वाले जोधपुर के व्यापारी की तलाश कर रही है। आरोपी व्यापारी को भी जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
अजय मोर, प्रभारी सीआईए-वन पानीपत