फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बंटवारे में 10 करोड़ कम मिले तो पहले बच्चों को दिया जहर, फिर भी नहीं मरे तो गला दबाकर की हत्या, पति व पत्नी भी फंदे पर झूले, पति

विज्ञापन
विज्ञापन
फोटो 5 से 17
विज्ञापन


बंटवारे में 10 करोड़ रुपये कम मिलने से नाराज था कारोबारी
काफी दिनों से परिवार में तकरार भी चल रहा था
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत/समालखा। समालखा के इस्पात कारोबारी रितेश गर्ग कारोबारी बंटवारे में 10 करोड़ रुपये कम मिलने से नाराज था। इसी बात को लेकर काफी दिनों से परिवार में तकरार भी चल रहा था। इस वजह से उसने वारदात को अंजाम दिया।
रितेश की पत्नी रेखा का पथरी का ऑपरेशन हुआ था। वहीं वीरवार की देर रात को रेखा के स्वास्थ्य की जानकारी लेने के लिए परिवार व रिश्तेदारों ने पहले रितेश के मोबाइल पर कॉल की। रितेश के फोन नहीं उठाने पर रेखा के इसके बाद वंश व पुष्टि के मोबाइल फोनों पर कॉल की, लेकिन चारों के मोबाइल फोन नहीं उठाने पर रिश्तेदारों व परिजनों ने रितेश के मकान मालिक अनिल बत्रा को काल की। बत्रा ने अपने घर की प्रथम मंजिल पर जाकर रितेश के कमरे का दरवाजा खटखटाया, लेकिन घर के अंदर कोई हलचल नहीं हुई। बत्रा ने इस घटना की सूचना रितेश के भाई दिनेश को दी। दिनेश ने इस घटना की जानकारी पुलिस को दी। पुलिस के आने पर रितेश के कमरे का दरवाजा तोड़ा गया। रितेश का शव फंदे पर लटका हुआ था, पास ही रितेश की पत्नी रेखा फर्श पर अचेत हालत में फर्श पर पड़ी थी, जबकि दूसरे कमरे में बेड पर वंश व पुष्टि मृत हालत में पड़ी मिली। रेखा को तत्काल पानीपत के एक निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया। रेखा का उपचार कर रहे चिकित्सकों ने बताया कि रेखा की ठीक से सांस नहीं ले पा रही है और उनकी हालत गंभीर है। डीएसपी हेड क्वार्टर जगदीप दूहन ने बताया कि रितेश व उसके दो बच्चों की मौत व पत्नी रेखा के अचेत हालत में मिलने के मामले की पुलिस गहन जांच कर रही है।
विज्ञापन


पांच माह पहले हुआ था बंटवारा
पांच माह पहले दिनेश व रितेश के बीच बंटवारा हुआ था। पिता राजेंद्र प्रकाश गर्ग ने दोनों भाइयों को लोहे की फैक्टरी और 30-30 करोड़ रुपये मिले थे। रितेश बंटवारे में 10 करोड़ रुपये कम मिलने से नाराज था। इसी को लेकर रितेश की परिवार में तकरार भी चल रही थी। इसी से परेेशान होकर रितेश बच्चों को मारकर अपना भी जीवन खत्म करने का प्रयास किया।

बच्चों की किताबें भी बिखरी हुई थीं
बच्चों के ड्राइंग रूम में बेड पर स्कूल बैग से किताबें निकली हुई थीं। दो गद्दे नीचे डाल रखे थे। ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे बच्चों ने खाना खाने के बाद पढ़ाई के लिए किताबें निकाली थीं। बच्चों को पढ़ते वक्त मारा गया था। घर के अंदर घुसते ही फर्श पर खून पड़ा हुआ दिखाई दिया। ये खून उसी जगह पड़ा था, जहां रेखा फंदे से खिसक कर गिरकर गई थी। रेखा के सिर पर चोट भी थी। कमरे के अंदर खूंटी पर काले व लाल रंग की दो चुन्नी बंधी हुई थी। फंदे के पास दो साइड वाली सीढ़ी भी रखी हुई मिली। इस पर चढ़ कर दंपति ने फंदा लगाया था। बच्चों के ड्राइंग रूम में दो बेड के गद्दे जमीन पर पड़े हुए थे। इस पर दोनों बच्चे के शव थे। गद्दों पर बिछी चादर पर खून व उलटियों के दाग थे। पास में पड़े दीवान बेड पर बच्चों के कपड़े व स्कूल के बैग थे। दीवान बेड पर स्कूूल की कॉपियां व किताबें खुली हुई पड़ी थीं। इसी के पास तीन पेन और दो पेंसिल भी पड़ी हुई थी। रसोई में रात के खाना बनाए हुए बर्तन भी झूठे पड़े हुए मिले। गैस पर दूध से भरा हुआ भगोना भी पड़ा था। कमरे के बाहर तसले के नीचे कागज के टुकड़े जले हुए बरामद हुए। कागजों के बीच मोबाइल फोन, मेमोरी कार्ड, माइक्रो सिम व अखबार के कागज जले हुए मिले। उधर, जानकारी मिली है कि दोनों बच्चे डीपीएस समालखा में पढ़ते थे।

माता-पिता ने ले रखा है संन्यास
रितेश गर्ग पुत्र राजेंद्र प्रकाश गर्ग मूल निवासी समालखा लोहे के व्यापारी थे। रितेश अपने भाई दिनेश गर्ग के साथ समालखा में लोहे की अपनी तीन फैक्टरी चलाते थे। वहीं गर्ग परिवार लोहे के स्क्रैप का कारोबार भी करता है। राजेंद्र प्रकाश गर्ग और उसकी पत्नी सुशीला गर्ग ने संन्यास ले रखा है। दोनों अधिकांश समय हरिद्वार में ही रहते हैं। साधन संपन्न गर्ग भाइयों की एक बहन ममता भी थी। उसकी सड़क हादसे में मौत हो गई थी। वहीं ममता की इच्छा डॉक्टर बनकर निर्धन वर्ग की सेवा करने की थी। लेकिन उससे पहले ही वह इस दुनिया से चल बसी। बहन की इच्छा को पूरा करने के लिए गर्ग बंधुओं ने समालखा में प्लाट खरीदा था। इस प्लॉट में अपने बहन ममता की याद में निर्धन वर्ग के उपचार के लिए दोनों भाइयों को अस्पताल बनाना था।

अंतिम संस्कार किया
पुलिस ने जांच पूरी करने और पोस्टमार्टम के बाद रितेश, वंश व पुष्टि के शवों को उनके परिजनों को सौंप दिया। तीनों का समालखा स्थित उनके घर पर लाया गया। यहां अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करने के बाद तीनों शवों की अंत्येष्टि कर दी गई।
विज्ञापन


हर जगह से निराशा मिलने के बाद ऐसा कदम उठाते हैं लोग: डॉ. नागपाल
इंसान हर जगह से हताश होने के बाद आत्महत्या जैसे कदम उठाता है। वह समाज से बिल्कुल कट जाता है। यह प्रवृति इंसान के अंदर एकदम नहीं आती, बल्किवह धीरे धीरे ऐसी स्थिति में आता है। वह स्वयं को पूरी तरह से हारा हुआ महसूस करता है और सुसाइड खत्म कर इस दर्द को दूर करने का प्रयास करता है। अगर कोई भी व्यक्ति अलग-थलग रहने लगता है तो परिजनों को उससे इस बारे में बात करनी चाहिए।
- डॉ. मोना नागपाल, मनोरोग विशेषज्ञ सिविल अस्पताल
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें