कांग्रेस समर्थित पार्षदों ने प्रदेश प्रवक्ता कर्मबीर सैनी का पुतला फूंका और जमकर रोष व्यक्त किया। वे सब प्रदेश प्रवक्ता द्वारा वीरवार को धरनारत पार्षदों के कांग्रेसी न होने व अपने स्वार्थों को लेकर धरने पर बैठने की बात कहने से खफा थे। पार्षदों ने आठ जून को सीएम के बुलावे पर ही कार्यकर्ता सम्मेलन में जाने की चेतावनी दी है।
प्रदेश प्रवक्ता ने पार्षदों के बीच में आकर माफी मांगने की कही है। कांग्रेस समर्थित नगर निगम के पार्षदों ने शुक्रवार दोपहर को कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता कर्मबीर सैनी के पुतले की यात्रा निकाली और लघु सचिवालय के वीआईपी गेट के सामने उनका पुतला फूंका।
पार्षद जयकुवार व सुरेंद्र गर्ग ने कहा कि वे कांग्रेस के सच्चे सिपाही हैं और लंबे समय से पार्टी की सेवा कर रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस के समर्थन पर नगर निगम का चुनाव लड़ा था और कांग्रेस के मेयर को अपना समर्थन दिया था। वे वार्डों की जनता के हक को लेकर धरने पर बैठे हैं और उन्होंने उनके हक को लेकर संघर्ष करने की चेतावनी दी थी।
वे बाहरी कालोनियों को नियमित करने और यहां सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। पार्षद रामरत्न अग्रवाल ने कहा कि जनता के हकों की आवाज उठाना गलत है तो वे यह गलती समस्या के समाधान तक करते रहेंगे। उनको कांग्रेस में होने के लिए प्रवक्ता के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है।
प्रदेश प्रवक्ता को उन पर सवाल उठाने की बजाय पहले खुद को लेना चाहिए। पार्षद पति संजीव कुमार ने कहा कि प्रदेश प्रवक्ता का पानीपत का पता है और न ही पानीपत के इतिहास की जानकारी। लोगों ने उनको उम्मीद के साथ वोट दी थी और आज उनकी उम्मीद टूट रही है।
वे बाहरी कालोनियों में लोगों को पीने का पानी, सड़के व बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर बैठे हैं। पार्षद सुरेंद्र गर्ग ने कहा कि कांग्रेस के प्रवक्ता ने पार्षदों के जले पर नमक छिड़कने का काम किया है। प्रवक्ता अपनी राजनीति चमकाने के चक्कर में पार्षदों की इमानदारी पर सवाल उठा गए।
ये था मामला
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रवक्ता कर्मबीर सैनी वीरवार को सरकारी विश्राम गृह में आठ जून को पानीपत में होने वाले कार्यकर्ता सम्मेलन की तैयारियों को लेकर पत्रकार वार्ता करने पहुंचे थे।
वे पानीपत समेत प्रदेश में कांग्रेस सरकार द्वारा कराए गए विकास कार्यों को गिनवा रहे। ऐसे में पत्रकारों ने कांग्रेस समर्थित पार्षदों के धरने पर बैठने का सवाल पूछ लिया।
उन्होंने यहां स्पष्ट रूप से कहा था कि आज सरकार के खिलाफ धरने पर बैठने वाले कांग्रेसी नहीं हो सकते और न ही वे जनता के हित के लिए धरने पर बैठे हैं।
ऐसे लोगों को अपना हित पूरा नहीं हो पा रहा होगा। जिससे वे धरने पर बैठने जैसे कदम उठा रहे हैं। उनके इन बयानों को पढ़कर कांग्रेस समर्थित पार्षद गुस्सा गए और संघर्ष का फैसला ले लिया।