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कोरोना वायरस का ग्रामीण क्षेत्रों में अटैक अब 40 प्रतिशत मरीज मिल रहे, 9 दिन में 27 लोगों की मौत

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संदीप भौरिया
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पानीपत। कोरोना वायरस अब ग्रामीणों क्षेत्रों में खतरनाक साबित हो रहा है। कोरोना की पहली लहर में ग्रामीण क्षेत्रों में प्रभाव कम था, लेकिन इस लहर में ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक अटैक हुआ है। एक मई से 9 मई तक जिले में 4500 कोरोना के केस मिले हैं। इनमें से 1750 केस ग्रामीण क्षेत्रों से हैं। कोरोना से इन दिनों 60 लोगों की मौत हुई है। इनमें से 27 लोग ग्रामीण क्षेत्रों के रहने वाले थे। अब ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार बढ़ रहे कोरोना के प्रभाव को रोकने के लिए जिला पंचायती विभाग ने गांवों में सैनिटाइजेशन कार्यक्रम शुरू किए हैं। इसराना व बापौली क्षेत्र के गांवों को पहले सैनिटाइज किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में वायरस का प्रभाव इसलिए अधिक हो रहा है, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में लोग वैक्सीनेशन कराने से कतरा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग जांच भी कम करवा रहे हैं। गांवों में मास्क का प्रयोग कम हो रहा है लॉकडाउन के नियम भी टूट रहे हैं।
कम लोगों ने कराई वैक्सीनेशन
जिले में अब तक 1 लाख 31 हजार लोग कोरोना की वैक्सीन लगवा चुके हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में अब तक 50 हजार लोगों ने ही वैक्सीन लगवाई है। स्वास्थ्य विभाग लगातार ग्रामीण क्षेत्रों में वैक्सीनेशन कार्यक्रम चला रहा है, लेकिन लोगों में वैक्सीन को लेकर गलत भ्रम है, इसलिए वे वैक्सीनेशन से बच रहे हैं।
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शादी समारोह से बढ़ा वायरस का खतरा
ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी लोग कोरोना के खिलाफ जागरूक नहीं हैं। मार्च और अप्रैल में ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत अधिक शादी समारोह हुए हैं। वहां पर लोगों की भीड़ जुटी है। इसलिए कोरोना वायरस ने वहां अधिक प्रभाव डाला है।
25 प्रतिशत लोगों में बन चुकी थी एंटीबॉडी
पिछले साल सरकार ने ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में सीरो सर्वे कराया था। इसमें ये साफ हुआ था कि गांवों के 25 प्रतिशत और शहर के 14 प्रतिशत लोगों में एंटीबॉडी बन चुकी है। इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों में वायरस का अटैक कम है, लेकिन कोरोना की दूसरी लहर में ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अधिक कोरोना की चपेट में आ रहे हैं।
संक्रमित शवों का चोरी छुपे हो रहा अंतिम संस्कार
ग्रामीण क्षेत्रों में वायरस का अधिक प्रभावी होने का मुख्य कारण ये भी है कि लोगों की कोरोना से मौत हो रही है, लेकिन वे लोग अपनी संस्कृति को अधिक तव्वजो देते हैं और संक्रमित बॉडी के बारे में प्रशासन को सूचना ना देकर खुद अंतिम संस्कार कर रहे हैं। इससे काफी लोग संक्रमित हो रहे हैं। बाद में जांच होने पर ये बात साबित भी हो रही है।
दिन-रात दुकानें खुले रहना भी बड़ा कारण
शहर में लॉकडाउन का प्रभाव 70 प्रतिशत तक दिखाई देता है, जबकि गांव में लॉकडाउन का कोई प्रभाव देखने को नहीं मिलता। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की टोलियां लगी रहती हैं। दिन रात दुकानें खुली रहती हैं।
अब तक 1 लाख से भी कम लोगों ने कराई जांच
स्वास्थ्य विभाग अब तक 2 लाख 85 हजार लोगों की जांच कर चुका है। इसमें से 24450 लोग कोरोना संक्रमित मिले हैं। इनमें से साढ़े आठ हजार लोग ग्रामीण क्षेत्रों से हैं। अब तक ग्रामीण क्षेत्र के 1 लाख लोगों ने भी अपनी कोरोना जांच नहीं कराई है।
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डिडवाडी, नांगलखेड़ी, मतलौडा, चुलकाना और बापौली को माना गया हॉट स्पॉट
अब प्रशासन ने गांव डिडवाडी, नांगलखेड़ी, मतलौडा, चुलकाना और बापौली को हॉट स्पॉट माना है। इन गांवों में कोरोना के अधिक केस मिल रहे हैं। अब जिला पंचायती राज विभाग ने इन गांवों में सैनिटाइजेशन कार्यक्रम शुरू किए हैं।
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