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कोर कमेटी की बैठक आज, एडहॉक कमेटियों पर भी हो सकता है फैसला

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पानीपत। भाजपा संगठन पदाधिकारियों की जिला कोर कमेटी की बैठक शनिवार को होगी। इसमें जनप्रतिनिधि और कोर कमेटी के सदस्य संगठन के सामने तीन साल से लंबित एडहॉक कमेटियों के प्रस्ताव को भी रख सकते हैं। इस पर बैठक में ही मुहर लग सकती है।
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पार्षदों का कहना है कि इन कमेटियों के लिए पहले से पार्षदों के नाम फाइनल करके भेजे जा चुके हैं। अब सिर्फ औपचारिक घोषणा की ही आवश्यकता है। इस विषय पर वीरवार शाम को हुई पार्षदों की बैठक में भी रखा गया था। इसके बाद इस विषय को कोर कमेटी के सामने लाने का फैसला लिया गया।
पार्षदों का कहना है कि चुनाव को हुए तीन साल हो चुके हैं लेकिन अब तक उनकी सब कमेटियां नहीं बन पाई हैं। इससे शहर की सत्ता की शक्तियों का केंद्रीयकरण हुआ है और शक्ति कुछ ही लोगों के हाथों तक सीमित रह गई है। इससे न तो शहर के विकास कार्यों में तेजी आ पा रही और न ही लोगों की समस्याओं का निदान हो रहा है। उन्होंने कहा कि वैसे तो शहर के सभी नेताओं को इस मुद्दे का पता है लेकिन इस पर अमल नहीं किया गया। अब इस विषय को संगठन की कोर कमेटी के सामने रखा जाएगा, ताकि इस पर फैसला हो सके।
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नियम एक्ट में हैं अनिवार्य
नगर निगम एक्ट के अनुसार नगर निगम में कई प्रकार की सब कमेटियों का होना अनिवार्य है। इनमें भवन निर्माण, फाइनेंस, इंफोर्समेंट, सफाई, बिजली व डिस्पोजल की कमेटियां बनाई जाती हैं। हर सब कमेटी मेें चार से लेकर पांच पार्षद होते हैं। इसमें एक कमेटी का चेयरमैन, एक वाइस चैयरमेन और तीन सदस्य बनाए जाते हैं। बता दें कि कोर कमेटी में दो पार्षद भी हैं। इनमें भाजपा जिला महामंत्री के नाते वार्ड नंबर दस के पार्षद रविंद्र भाटिया समेत वार्ड नंबर 20 के पार्षद लोकेश नंगरू के पास प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य का पद है। वहीं, इस कमेटी में कुल 23 सदस्य हैं।
बोले पार्षद एवं सदस्य
इस बारे में कोर कमेटी के सदस्य और वर्तमान पार्षद लोकेश नांगरू और रविंद्र भाटिया ने भी माना कि एडहॉक कमेटियां जरूर बननी चाहिए। ये शहर के विकास के लिए आवश्यक हैं। उन्होंने ये भी कहा कि अभी तक ये फाइनल नहीं है कि कोर कमेटी में इस मुद्दे को रखा जाएगा या नहीं। वैसे स्वभाविक तरीके से कोर कमेटी की बैठक केवल संगठन की होती है। इसके अलावा पार्षद अशोक कटारिया और संजीव दहिया ने भी ये कमेटियां शहर के हित के लिए जरूरी है। इससे पार्षदों की जिम्मेदारियां भी तय होंगी और लोगों की समस्याओं का समाधान भी होगा। ये पार्षदों का अधिकार भी है।
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