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सर्दी में निकलने लगी केबल की हवा

Sun, 13 Dec 2015 12:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/पानीपत
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सर्दी शुरू होते ही बिजली निगम की एबी केबल (एरियल बंचड) की 'हवा' निकलनी शुरू हो गई है। धड़ाधड़ इन  केबल में पंक्चर होने के कारण आम उपभोक्ताओं की जेब तो ढीली हो ही रही है।
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साथ ही उन्हें सुचारू रूप से बिजली भी नहीं मिल पा रही। हाल यह हैं कि निगम के पास इन पंक्चर को लगाने के लिए खुद के कर्मचारी नहीं हैं।

बहरहाल एबी केबल के पंक्चर लगाने के लिए ठेकेदारों की मदद ली जा रही है। हाइटेंशन लाइनों में (एचटी) लगने वाले एक पंक्चर की कीमत कम से कम 2400 रुपये है।

यदि पंक्चर बड़ा हो तो सात हजार रुपये में लगाया जा रहा है। ऐसे में पूरे प्रदेश के लिए खरीदी गई यह एबी केबल अब कबाड़ हो चुकी हैं।


निगम ने जितने हजार करोड़ की लागत से इन्हें खरीदा था उससे ज्यादा इनके पंक्चर लगाने पर खर्च कर दिए हैं। यह एबी केबल अब निगम के लिए सिवाए करोड़ों के कबाड़े के अतिरिक्त कुछ नहीं रही हैं।

यही कारण है कि बिजली निगम यूनियनों ने एबी केबल मामले में सीबीआई जांच करने की मांग कर दी है।

दरअसल वर्ष 2010 में पूरे प्रदेशभर में जर्जर हुई हाइटेंशन तारों (एसीएसआर, लोहे की तारें) को बदलते हुए भारी मात्रा में एबी केबल की खरीद की गई।

इतना ही नहीं इन केबल को खरीदते समय मानकों को ध्यान रखना भी निगम अधिकारी भूल गए। हजारों करोड़ रुपये की खरीदी गई इन एबी केबल्स की पोल उस समय खुलनी शुरू हुई जब इनमें पंक्चर होने शुरू हुए।
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पानीपत जिले की बात करें तो यहां करीब 350 फीडर हैं। इनमें से करीब 250 फीडर पर एचटी लाइनों पर एबी केबल लगाई गई।

निगम का तर्क था कि जर्जर तारों को बदलकर एबी केबल लगाने से कई वर्षों की उसकी परेशानी खत्म हो जाएगी। तर्क दिया गया कि यह केबल न तो ढीली होंगीं न ही टूटेंगी।

इसीलिए भारी मात्रा में इन्हें खरीदा गया। करीब एक-दो साल तक एसीएसआर तारों को बदलकर एबी केबल लगाने का काम जैसे ही पूरा हुआ और इन केबल्स पर लोड पड़ा तो पोल खुल गई।

इनमें पंक्चर होने शुरू हो गए। ज्यादातर अधिक सर्दी और अधिक गर्मी में इन एबी केबल्स में सबसे अधिक दिक्कतें आती हैं। चूंकि इन्हीं दिनों इन लाइनों पर दबाव पड़ता है।

एचटी लाइन पर एबी केबल में पंक्चर होने पर छोटे से छोटे एक पंक्चर की कीमत 2400 व बड़े पंक्चर की कीमत सात हजार रुपये हैं।

हाल यह है कि 500 मीटर की केबल में आठ से 10 तक पंक्चर लगे हुए हैं। ऐसे में आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि 250 फीडरों पर फैले एबी केबल्स के जाल की क्या हालत होगी और इन पर कितनी राशि खर्च की जा चुकी होगी।

ट्रांसफार्मरों पर होती है एचटी लाइनों से सप्लाई
हाइटेंशन लाइनों (एचटी) से सीधे तौर पर ट्रांसफार्मरों पर सप्लाई होती है। यह एबी केबल भी 11केवी फीडर्स पर लगाई गई है। इन फीडरों से आगे सप्लाई लॉ टेंशन लाइनों (एलटी) में जाती है।

यही लॉ टेंशन लाइनें घरों में बिजली आपूर्ति करती हैं। हाइटेंशन लाइनों में दिक्कत आने पर लॉ टेंशन लाइनों को सप्लाई नहीं मिल पाती और घरों में बिजली आपूर्ति ठप हो जाती है।

लाइन लोस की तरह एबी केबल्स पर जितने भी पंक्चर लगाए जाते हैं उनका खर्चा आम उपभोक्ताओं को ही वहन करना पड़ता है। टोटल खर्च को बिजली बिलों में जोड़ दिया जाता है।

इसी कारण बार-बार बिजली के भारी भरकम बिल पहुंच रहे हैं। हाइटेंशन लाइनों पर पंक्चर लगाने के लिए ठेकेदारों की मदद ली जाती है। इसी कारण लंबे समय तक फीडर बंद करने पड़ते हैं। ग्रामीणों क्षेत्रों में सबसे अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

गायब हो गई एसीएसआर
एबी केबल्स को लगाने के दौरान उतारी गई एसीएसआर कहां गई इस बात का बिजली निगम के पास ज्यादा रिकार्ड नहीं है। कई ठेकेदारों ने यह निगम के स्टोर में जमा कराई तो कई ने इसे उतारकर बेच दिया। मजेदार बात तो यह है कि एबी केबल में पंक्चर के बाद जो टुकड़ा केबल का टूटता है उसका पूरा रिकॉर्ड भी निगम के पास नहीं है। बहरहाल यहां पर भी भारी मात्रा में गड़बड़झाला हुआ है।

निगम करीब 32 हजार करोड़ रुपये के घाटे में
आल हरियाणा पॉवर कार्पोरेशन पानीपत के यूनिट सचिव भले राम शर्मा ने बताया कि 16 अगस्त 1998 को बिजली बोर्ड को खत्म कर बिजली निगम बनाया गया था।

चूंकि उस समय बोर्ड करीब 450 करोड़ रुपये के घाटे में था। लेकिन अब बिजली निगम करीब 32 हजार करोड़ के घाटे में हैं। लाइन लोस और एबी केबल्स खरीद में हुए गड़बड़झाले इस घाटे के जिम्मेदार हैं। आम आदमी तो बिल ही भर सकता है और वह भर भी रहा है। भले राम शर्मा इस पूरे मामले की किसी निष्पक्ष जांच एजेंसी से जांच कराने की मांग की है।

एबी केबल की खरीद में इतनी जल्दबाजी दिखाई गई कि इसे प्रायोगिक तौर पर इस्तेमाल करके भी देखना जरूरी नहीं समझा। खरीदते समय किन्हीं भी मानकों का ध्यान नहीं रखा गया। घटिया किस्म की एबी केबल खरीदी गई। इतना ही नहीं इन केबल को लगाने के बाद उतारे गए कंडक्टर कहां गए किसी को इस बात की खबर नहीं है। एबी केबल के पंक्चर का बोझ सीधे तौर पर जनता पर पड़ रहा है। सात-सात हजार रुपये के पंक्चर लगते हैं। हाल यह हैं कि 500 मीटर एबी केबल में 8-10 पंक्चर लगे हैं। इतने में तो नई तार ही आ जाती है। पूरे मामले की हम सीबीआई से जांच की मांग करते हैं। जो भी इस मामले में दोषी पाया जाए उसपर कार्रवाई होनी चाहिए।
तेजपाल, सर्कल सचिव, ऑल हरियाणा पावर कार्पोरेशन, पानीपत।

किसी भी तरह का गड़बड़झाला नहीं हुआ। जहां से एबी केबल टूट रही हैं उन्हें अब बदलवाया जा रहा है। इससे किसी भी तरह की दिक्कतें नहीं आ रही हैं। पंक्चर केवल एचटी लाइनों में ही होते हैं। एलटी लाइनों में पंक्चर नहीं होते।
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बीएस गर्ग, एसई पानीपत।
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