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Panipat News: ठीक होगी कंडम फेको मशीन, मिलेगी सुविधा

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पानीपत। अब सिविल अस्पताल में दर्द और बड़ा चीरा रहित मोतियाबिंद की सर्जरी करने के प्रयास शुरू हो गए हैं। सर्जरी के लिए कंडम फेको मशीन को ठीक कराया जाएगा। सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने मशीन को ठीक कराने के निर्देश दे दिए हैं। वे मशीन चलाने के लिए नेत्र रोग विशेषज्ञों को रोहतक पीजीआई में प्रशिक्षण दिलाएंगे। जिससे लोगों को इस सर्जरी के लिए खानपुर और करनाल मेडिकल कॉलेज रेफर न करना पड़े। इसके लिए मुख्यालय के अधिकारियों से बात की जा रही है। ।
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सरकार ने स्वास्थ्य विभाग को 16 साल पूर्व 2008 में फेको मशीन दी थी। इस मशीन से उच्च तकनीक के जरिये बिना टांकों की सर्जरी होती है। इसके लिए तत्कालीन सर्जन डॉ. आशुतोष को जयपुर में प्रशिक्षण दिलाया गया था। इस प्रशिक्षण पर एक लाख रुपये खर्च आया था। इसके बाद भी 15 लाख की इस मशीन से एक भी सर्जरी नहीं हुई और ये पैकिंग में ही कंडम हो गई।
जानकारी के अनुसार फेको मशीन से मोतियाबिंद के उपचार के लिए बड़े चीरे की आवश्यकता नहीं होती। आंख में महज 2.8 एमएम का बारीक छेद किया जाता है। मशीन के माध्यम से मोतिया को आंख के अंदर ही घोल दिया जाता है। इस मशीन से फोल्डेबल लेंस को आंख के अंदर प्रत्यारोपित कर दिया जाता हैं। इसे टापिकल माइक्रो फेको तकनीक कहते हैं। कोई इंजेक्शन नहीं लगाया जाता। दवा की कुछ बूंदें डाली जाती हैं। ऑपरेशन का सबसे बड़ा लाभ यह है कि बिना दर्द इस आपरेशन के बाद मरीज को आंखों पर पट्टी भी बांधनी नहीं पड़ती। फिलहाल पानीपत सर्जरी में पिछड़ रहा है। पिछले एक साल में महज 115 लोगों की मोतियाबिंद की सर्जरी हुई हैं। अब लोग फेको मशीन से सर्जरी कराना चाहते हैं। इसलिए वह निजी अस्पतालों की ओर रुख कर रहे हैं।
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वर्जन
फेको मशीन की जांच कराई जाएगी। मशीन अगर खराब मिलती है तो उसे ठीक कराया जाएगा। डॉक्टरों को प्रशिक्षण देकर फेको मशीन से मोतियाबिंद की सर्जरी शुरू कराएंगे।
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- डॉ. जयंत आहूजा, सिविल सर्जन पानीपत।
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